फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफएमआरआई), गुरुग्राम में डॉक्टरों की मल्टीडिसीप्लिनरी टीम ने एक असाधारण और हाई-रिस्क सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 67 वर्षीय इथियोपियाई महिला के पेट से करीब 12 किलोग्राम वज़न का दुर्लभ कैंसरग्रस्त गैस्ट्रिक ट्यूमर निकालकर उसकी जान बचाई। यह सर्जरी चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व डॉ. अमित जावेद, प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं एचओडी, जीआई, जीआई ऑन्को, बेरियाट्रिक, रोबोटिक एंड एमआईएस सर्जरी ने किया। उनके साथ डॉ. नरोला यंगर, प्रिंसिपल कंसल्टेंट, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑन्कोलॉजी समेत अनुभवी डॉक्टरों की टीम शामिल रही। सर्जरी से पहले विस्तृत और सटीक योजना बनाई गई, जिसके बाद अत्याधुनिक सर्जिकल तकनीकों की मदद से इस विशाल ट्यूमर को सुरक्षित रूप से निकाला गया।
मरीज ताहिर आब्दी हिर्सी को फोर्टिस गुरुग्राम लाए जाने पर पेट में तेज दर्द, भूख न लगना, पेट फूलना और पेट में कठोर गांठ महसूस होने जैसी गंभीर शिकायतें थीं। जांच के दौरान अपर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी, सीटी स्कैन और पेट-सीटी इमेजिंग में उनके पेट में एक बेहद बड़े और दुर्लभ जीआईएसटी (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर) का पता चला, जो अपने अनिश्चित व्यवहार और सर्जरी के दौरान जटिलताओं के लिए जाना जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार, ट्यूमर पेट से निकलकर लिवर के निचले हिस्से और स्पलीन तक फैल चुका था और पैंक्रियाज़ व कोलन के बेहद करीब पहुंच गया था। ट्यूमर के अत्यधिक आकार के कारण सामान्य सर्जिकल तकनीक से ऑपरेशन संभव नहीं था, ऐसे में थोरैको-एब्डॉमिनल सर्जरी (थोरैकोटॉमी) का सहारा लिया गया, जिसमें छाती और पेट दोनों को खोलकर ऑपरेशन किया गया। तमाम तकनीकी चुनौतियों और भारी रक्तस्राव के खतरे के बावजूद करीब तीन घंटे चली सर्जरी सफल रही और मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही। नौ दिनों के भीतर उन्हें स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉ. अमित जावेद ने बताया,
“इतने बड़े ट्यूमर के मामलों में अनियंत्रित ब्लीडिंग और गंभीर जटिलताओं का खतरा रहता है, जिस वजह से कई अस्पताल ऐसे मरीजों का इलाज करने से मना कर देते हैं। यह ट्यूमर आकार में बेहद असामान्य था और इसके कारण सामान्य एनाटॉमी पूरी तरह बिगड़ चुकी थी। बावजूद इसके, हमारी टीम ने सावधानीपूर्वक योजना बनाकर थोरैको-एब्डॉमिनल सर्जरी की और ट्यूमर के साथ पेट, स्पलीन और लिवर का प्रभावित हिस्सा भी हटाया, ताकि कैंसर को पूरी तरह खत्म किया जा सके।”
अपनी भावनाएं साझा करते हुए मरीज ने कहा,
“फोर्टिस आने से पहले मैं लगातार दर्द में थी और डरती थी कि इतनी बड़ी सर्जरी के बाद शायद मैं बच भी न पाऊं। डॉक्टरों ने मुझे भरोसा दिया और हर बात धैर्य से समझाई। आज मुझे लगता है कि मुझे दूसरा जीवन मिला है। मैं फोर्टिस के डॉक्टरों और स्टाफ की हमेशा आभारी रहूंगी।”
वहीं, यश रावत, फैसिलिटी डायरेक्टर एवं सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, एफएमआरआई गुरुग्राम ने कहा,
“यह केस एक बार फिर साबित करता है कि फोर्टिस गुरुग्राम एडवांस सर्जिकल केयर, टीमवर्क और हाई-रिस्क ऑन्कोलॉजिकल मामलों में भी बेहतरीन परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध है। जहां कई बड़े अस्पतालों ने इलाज से इनकार कर दिया था, वहीं हमारी टीम ने मरीज को नया जीवन दिया।”
यह सर्जरी न सिर्फ फोर्टिस गुरुग्राम की विशेषज्ञता को दर्शाती है, बल्कि भारत में जटिल और हाई-रिस्क कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी मानी जा रही है।


