नई दिल्ली(जीतेन्द्र शर्मा): भारत मंडपम में आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 अपने आठवें दिन भी अभूतपूर्व जनउत्साह और वैचारिक जीवंतता का केंद्र बना रहा। सप्ताहांत की भारी भीड़ के बीच देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व, सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों, विद्वानों और रचनाकारों की उपस्थिति ने मेले को एक राष्ट्रीय बौद्धिक उत्सव का स्वरूप दे दिया।

माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह तथा माननीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने पुस्तक मेले के विभिन्न हॉलों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने थीम पवेलियन “भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा @ 75” का अवलोकन किया, जहां भारत की सैन्य परंपरा, पराक्रम और रणनीतिक विकास को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय पवेलियन और सम्मानित अतिथि देश कतर के विशेष पवेलियनों का भी दौरा किया और वैश्विक सहभागिता की सराहना की। साथ ही हिंदी और भारतीय भाषाओं के प्रकाशकों से संवाद कर पठन संस्कृति और स्वदेशी ज्ञान को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।

पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान ने भी मेले का दौरा कर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के स्टॉल का अवलोकन किया और इसे ज्ञान, संस्कृति और विचारों के उत्सव का प्रभावशाली मंच बताया।
थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने विशेष रूप से थीम पवेलियन का दौरा किया। उन्होंने प्रमुख सैन्य अभियानों पर आधारित क्यूरेटेड पैनल, परमवीर चक्र गैलरी और जमीनी नेतृत्व को दर्शाती प्रदर्शनी देखी। बच्चों के पवेलियन ‘किड्स एक्सप्रेस’ में उन्होंने स्कूली छात्रों से संवाद कर उन्हें पुस्तकें भेंट कीं, जिससे युवा पीढ़ी में पठन के प्रति रुचि को प्रोत्साहन मिला।
शनिवार को मेले में राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश नारायण सिंह, राज्यसभा सांसद श्री राधा मोहन दास अग्रवाल, सुश्री जया किशोरी, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता और राज्यसभा के पूर्व सदस्य श्री विनय सहस्रबुद्धे सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की।
संसदीय विरासत पर गंभीर विमर्श
दिल्ली विधानसभा द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘शताब्दी यात्रा: वीर विठ्ठलभाई पटेल’ पर आयोजित चर्चा में भारत की लोकतांत्रिक यात्रा के सौ वर्षों पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने इसे न केवल ऐतिहासिक दस्तावेज, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों का मार्गदर्शक बताया और डिजिटल अभिलेखागार की आवश्यकता पर बल दिया।
भारत–जापान सांस्कृतिक संवाद का सशक्त दृश्य
इंटरनेशनल इवेंट्स कॉर्नर में जापानी मंगा कलाकार योशितोकी ओइमा का लाइव स्केचिंग सत्र युवाओं के लिए विशेष आकर्षण रहा। ‘टू योर इटर्निटी’ के पात्र ‘फुशी’ के चित्रांकन के दौरान कला और संवेदना का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने भारत और जापान के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत किया।
प्राचीन ज्ञान, आधुनिक संदर्भ
‘एनशिएंट माइंड्स, मॉडर्न वॉर्स’ सत्र में सैन्य अधिकारियों ने पंचतंत्र, महाभारत और अर्थशास्त्र जैसे ग्रंथों की आधुनिक रणनीतिक प्रासंगिकता को रेखांकित किया और बताया कि ये ग्रंथ आज भी नीति और निर्णय निर्माण के लिए मार्गदर्शक हैं।
कुल मिलाकर, नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 केवल पुस्तकों का आयोजन नहीं, बल्कि विचार, संस्कृति, इतिहास और भविष्य के बीच संवाद का सशक्त मंच बनकर उभरा है—जहां सत्ता, सेना, साहित्य और समाज एक साथ संवाद करते नजर आए, जो किसी भी सशक्त लोकतंत्र की पहचान है।


