नोएडा, 25 अगस्त। नोएडा में हुए एक गंभीर सड़क हादसे में 27 वर्षीय युवक को सिर, चेहरे, छाती, फेफड़ों और बाएं हाथ में गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद युवक बेहोशी और सांस लेने में परेशानी की हालत में अस्पताल पहुंचा। जांच में दिमाग में ब्लीडिंग के साथ गंभीर ब्रेन इंजरी, चेहरे की कई हड्डियों में फ्रैक्चर, पसलियों में चोट और फेफड़े के पिचकने की स्थिति सामने आई। डॉक्टरों की विभिन्न विशेषज्ञ टीमों की देखरेख में चले इलाज के बाद युवक की हालत स्थिर हुई और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
जानकारी के मुताबिक दिल्ली निवासी नीरज कुमार मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे थे। नोएडा में मोटरसाइकिल के स्पीड ब्रेकर से टकराने के बाद वह सड़क पर गिर गए। हादसे में उनके सिर के अलावा चेहरे, छाती, फेफड़ों और बाएं हाथ में गंभीर चोटें आईं। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया। उस समय वह बेहोश थे और बहुत धीमी सांस ले रहे थे।
डॉक्टरों ने तत्काल उनकी सांस की नली में ट्यूब डालकर मैकेनिकल वेंटिलेशन शुरू किया और उन्हें ICU में रखा गया। शुरुआती जांच में उनका ग्लासगो कोमा स्केल (GCS) E1V2M2 था, जो गंभीर स्तर की बेहोशी को दर्शाता है।
ब्रेन स्कैन में दो गंभीर चोटें सामने आईं
CT ब्रेन की जांच में डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी (DAI) और सबअराक्नॉइड हैमरेज का पता चला। ब्लीडिंग दिमाग के वेंट्रिकल्स तक भी पहुंच गई थी। इसके अलावा सिर के बाईं ओर खून जमा होने और सूजन की स्थिति भी सामने आई।
न्यूरोसाइंस टीम ने मरीज की न्यूरोलॉजिकल स्थिति की लगातार निगरानी की और समय-समय पर फॉलो-अप स्कैन कराए। बाद की जांच में इंट्रावेंट्रिकुलर हैमरेज में कमी और सिर के बाईं ओर जमा खून व सूजन में सुधार पाया गया। CT ब्रेन एंजियोग्राफी में कोई स्पष्ट असामान्यता नहीं मिली।
चेहरे की कई हड्डियां कई टुकड़ों में टूटीं
हादसे में नीरज के चेहरे पर भी गंभीर चोटें आईं। CT जांच में चेहरे की कई हड्डियों में कई टुकड़ों में फ्रैक्चर और हड्डियों के अपनी सामान्य जगह से खिसकने की स्थिति सामने आई। गाल की हड्डी और उसका आर्च, जबड़े तथा ऊपरी जबड़े के अलावा आंखों के आसपास की हड्डियां भी प्रभावित हुई थीं। चेहरे पर काफी सूजन और सॉफ्ट टिश्यू इंजरी भी थी।
इसके अलावा छाती की सात से आठ पसलियों में फ्रैक्चर, फेफड़ों में चोट और एक फेफड़े के पिचकने जैसी स्थिति भी सामने आई। बाएं हाथ की उंगलियों में भी गंभीर चोटें थीं।
कई विशेषज्ञ विभागों ने मिलकर किया इलाज
कैलाश हेल्थकेयर के न्यूरोसाइंसेज निदेशक डॉ. श्रीकांत शर्मा ने बताया कि मरीज को गंभीर सिर की चोट के साथ शरीर के कई अन्य हिस्सों में भी चोटें थीं। ऐसे में सबसे पहले उसे स्थिर करना और दिमाग की स्थिति की लगातार निगरानी करना जरूरी था। उनके मुताबिक मरीज की न्यूरोलॉजिकल स्थिति की नियमित जांच के साथ फॉलो-अप स्कैन किए गए और अन्य चोटों का भी उपचार किया गया।
इलाज के दौरान न्यूरोसर्जरी के साथ प्लास्टिक सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, पल्मोनोलॉजी, ENT, डेंटल केयर और क्रिटिकल केयर से जुड़े विशेषज्ञों की भूमिका रही। मरीज की अलग-अलग चोटों को देखते हुए उपचार को आपसी समन्वय के साथ आगे बढ़ाया गया।
‘इलाज के साथ परिवार का हौसला भी मिला’
स्वस्थ होने के बाद नीरज कुमार ने कहा कि उनका ठीक होने का सफर लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा। उन्हें कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा और इस दौरान परिवार के सहयोग के साथ डॉक्टरों की लगातार देखभाल ने उन्हें हिम्मत दी। उपचार के बाद उनकी हालत स्थिर हुई और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
यह मामला गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में एक साथ कई अंगों में चोट लगने पर समय पर ट्रॉमा प्रबंधन, ICU निगरानी और विभिन्न विशेषज्ञों के बीच समन्वय की जरूरत को सामने लाता है। गंभीर ब्रेन इंजरी के साथ फेफड़े, छाती, चेहरे और हाथ में चोट होने की स्थिति में मरीज के उपचार में प्रत्येक चोट की समय पर पहचान और प्राथमिकता के आधार पर इलाज महत्वपूर्ण होता है।


