महावीर सिंह कैंतुरा और सोनम कैंतुरा की कहानी किसी साधारण परिवार की दास्तान नहीं, बल्कि उस संघर्ष और संकल्प का प्रमाण है, जिसने हज़ारों लोगों की ज़िंदगी की दिशा बदल दी। 2004 में ऋषिकेश के जोगीवाला माफी क्षेत्र का यह युवा साइंस में टॉपर था और एक सुरक्षित नौकरी का रास्ता लगभग तय माना जा रहा था।
लेकिन इसी दौरान उन्होंने ऐसा निर्णय लिया जिसने परिवार और समाज—दोनों को चकित कर दिया। उन्होंने डायरेक्ट सेलिंग जैसी अनिश्चित, चुनौतियों से भरी, परंतु व्यापक संभावनाओं वाली दुनिया को अपना करियर बनाने का फैसला किया। उस समय न आय की कोई गारंटी थी न भविष्य का आश्वासन—केवल यह विश्वास कि जीवन सुविधा की सीमाओं से ऊपर उठकर किसी बड़े उद्देश्य के लिए जिया जाना चाहिए।
शुरुआत आसान नहीं थी। ताने, शंकाएँ, सवाल—हर कदम पर बाधाएँ थीं। समाज में फैली भ्रांतियों के कारण कई बार अस्वीकार का सामना करना पड़ा। किंतु यह दंपति दृढ़ रहा।
घर-घर जाकर लोगों से मिलना, बार-बार “ना” सुनकर भी सीख लेना और अगले ही दिन नए संकल्प के साथ फिर निकल पड़ना—यही उनकी दिनचर्या बन गई।
धीरे-धीरे उनका सिस्टम इतना संगठित और प्रभावी हो गया कि युवा, महिलाएँ और अनेक परिवार उनकी कार्यशैली से प्रेरित होकर इस मिशन से जुड़ने लगे।
महावीर सिंह कैंतुरा का मानना है कि “विजेता दृष्टिकोण, स्पष्ट लक्ष्य, सही कौशल और दृढ़ विश्वास रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में चमत्कारिक सफलता आकर्षित कर सकता है।”
आज वे न केवल स्विट्ज़रलैंड, सिंगापुर जैसे देशों की यात्राएँ कर चुके हैं, बल्कि असंख्य लोगों को पहली बार फ्लाइट में बैठने, देश-विदेश घूमने और अपने सपनों को साकार करने में भी मार्गदर्शन दे रहे हैं।
उनकी सोच सरल है—“क्या हर दिन एक नए चेहरे पर मुस्कान लाई जा सकती है?”
उनकी पूरी टीम आज व्यवसाय के साथ-साथ समाजसेवा के माध्यम से भी मुस्कान बाँटने के लिए प्रतिबद्ध है। लक्ष्य स्पष्ट है—वर्ष 2035 तक दस लाख लोगों के जीवन में आर्थिक और मानसिक मजबूती की नई शुरुआत कराना।
सोनम कैंतुरा: एक साधारण गृहिणी से राष्ट्रीय स्तर की प्रेरणादायी नेता तक
इस यात्रा में सोनम कैंतुरा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। गृहिणी की भूमिका निभाते हुए भी उन्होंने अपने व्यवहार, नेतृत्व और कार्यशैली से देशभर की महिलाओं के लिए एक नई राह तैयार की।
आज इस नेटवर्क से जुड़कर महिलाएँ केवल आय ही नहीं अर्जित कर रहीं, बल्कि आत्मसम्मान, पहचान और आर्थिक स्वतंत्रता भी प्राप्त कर रही हैं।
किसी ने पहली बार घर की आमदनी संभाली, किसी ने अपने बच्चों की उच्च शिक्षा का सपना पूरा किया, तो कई महिलाएँ अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बनकर उभरी हैं।
सोनम का विश्वास सरल लेकिन सशक्त है—
“यदि किसी महिला में आत्मविश्वास और ईमानदार प्रयास हो, तो वह अपनी पूरी दुनिया बदल सकती है।”
उनकी पहल से देश के अनेक राज्यों में महिला समूह आर्थिक स्वतंत्रता और उद्यमिता का नया अध्याय लिख रहे हैं।
The Vaccine for Financial Freedom — युवाओं में वित्तीय जागरूकता की नई लहर
जिज्ञासा और सवालों के बढ़ते क्रम को देखते हुए महावीर सिंह कैंतुरा ने अपने अनुभवों और सफलता की रणनीतियों को एक पुस्तक में पिरोया।
The Vaccine for Financial Freedom आज युवाओं में डायरेक्ट सेलिंग के success process और structured success path को लेकर नई जागरूकता पैदा कर रही है।
इस पुस्तक ने हजारों पाठकों को विश्वास दिलाया है कि सीमित आय में भी स्वयं का व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है और उसी से सुरक्षित व स्थिर भविष्य निर्मित किया जा सकता है।
यह पुस्तक जानकारी भर नहीं देती—यह एक प्रेरणा, मार्गदर्शन और वास्तविक उदाहरणों पर आधारित दिशा-निर्देश है।
उद्यमिता जिसने बदले अनगिनत जीवन
इसी प्रणाली ने अनेक परिवारों के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन लाया है। उत्तराखंड की आंगनबाड़ी शिक्षिका उदीना नेगी इसका जीवंत उदाहरण हैं। सीमित आय में बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इस मिशन से जुड़कर उन्होंने अपने हालात बदल दिए।
आज उनकी बेटी मेडिकल की पढ़ाई कर रही है और बेटा विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा है।
देश के दूरदराज इलाकों में भी इसी प्रकार की अनगिनत कहानियाँ जन्म ले रही हैं—जहाँ डायरेक्ट सेलिंग उन परिवारों का सहारा बनी है जिन्हें वर्षों से अवसर का इंतज़ार था।
पूरे देश में फैल रहा नेतृत्व—प्रशिक्षकों और महिला नेताओं की मज़बूत टीम
इस अभियान से जुड़े रूपेश थलवाल, कुलदीप बिवाल, गोपाल रावल, विकास, गौरव जथूरी, देवेंद्र राठौर, रामकिशोर शाक्य, मृदुल कांती तरत जैसे प्रशिक्षक और कविता बाली, संगीता भंडारी, संगीता शर्मा, लक्ष्मी पुंडीर, सुनीता चौधरी, पूनम देवी, मंजू यादव और दिव्या कुंदलिया जैसी महिला लीडर्स देशभर में नई ऊर्जा और अवसर का प्रसार कर रहे हैं।
गाँवों से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक, यह नेटवर्क आर्थिक शिक्षा, कौशल और नेतृत्व का मजबूत मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।
सम्मान भले मिले, पर असली उपलब्धि उनकी टीम है
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों से अनगिनत सम्मान प्राप्त होने के बावजूद, यह दंपति अपनी टीम को ही अपनी सर्वोच्च उपलब्धि मानता है।
उनका कहना है— “जब कोई परिवार सुरक्षित होता है और किसी चेहरे पर नई उम्मीद दिखाई देती है, वही हमारा सबसे बड़ा पुरस्कार है।”
यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो नई शुरुआत का साहस रखते हैं और अपने भीतर छिपी संभावनाओं को वास्तविक रूप देना चाहते हैं।


