नई दिल्ली: बदलती जीवनशैली, अनियंत्रित खानपान और बढ़ते वायु प्रदूषण ने युवाओं की सेहत पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। हृदय रोग आज भी दुनिया भर में मौत की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है और अब इसकी चपेट में कम उम्र के लोग भी तेजी से आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक और सांस से जुड़ी बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं।
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि युवाओं में हृदय रोग एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। पहले 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक के मामले 10 में 1 हुआ करते थे, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 5 में 1 तक पहुंच गया है। अत्यधिक वर्कआउट, मैराथन के दौरान अचानक गिरना, ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड, मानसिक तनाव और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि वायु प्रदूषण, खासकर पीएम 2.5, दिल और रक्त नलिकाओं पर गहरा असर डाल रहा है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से शरीर में सूजन बढ़ती है और कम उम्र में ही हार्ट डिजीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि अब किशोरों और युवाओं में भी हृदय संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं।
इस विषय पर यथार्थ अस्पताल के डायरेक्टर एवं सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरैसिक सर्जरी डॉ. धीरज झाम्ब ने कहा कि हृदय रोग के मामले जरूर बढ़ रहे हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक और उन्नत सर्जिकल विकल्पों से इनका सफल इलाज संभव है। उन्होंने युवाओं को यह भ्रम छोड़ने की सलाह दी कि दिल की बीमारी केवल उम्र से जुड़ी होती है और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करने की अपील की।
वहीं, सीनियर कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डॉ. अजय अग्रवाल ने बताया कि आज 20 के अंतिम और 30 की उम्र के मरीजों में भी हार्ट अटैक और गंभीर कोरोनरी ब्लॉकेज के मामले सामने आ रहे हैं। खराब खानपान, नींद की कमी, लगातार तनाव, धूम्रपान, वेपिंग और वायु प्रदूषण—विशेषकर पीएम 2.5—कम उम्र में ही धमनियों में वसा जमने की प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं।
हृदय रोगों के साथ-साथ एनसीआर में सांस से जुड़ी बीमारियों के मामलों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। युवाओं और किशोरों में अस्थमा, सांस फूलना, लगातार खांसी और फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी जैसे लक्षण आम होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है।
सीनियर कंसल्टेंट रेस्पिरेटरी मेडिसिन एवं इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी डॉ. हरीश भाटिया के अनुसार बढ़ता वायु प्रदूषण, धूम्रपान, ई-सिगरेट का चलन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित दिनचर्या इसके मुख्य कारण हैं। उन्होंने युवाओं को नियमित व्यायाम, स्वच्छ वातावरण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच की सलाह दी।
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन में एंजियोप्लास्टी, ओपन हार्ट सर्जरी, वैरिकोज वेन्स के आधुनिक इलाज सहित हृदय और सांस संबंधी बीमारियों का समग्र एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि मरीजों को समय पर सही इलाज मिल सके।


