नई दिल्ली।तेजी से बढ़ता वायु प्रदूषण आज देश की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन चुका है। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अब तक किए गए प्रयास स्थायी समाधान साबित नहीं हो सके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा हालात में प्रदूषण के प्रभाव को संतुलित करने के लिए प्रति व्यक्ति 131 से अधिक पेड़ों की आवश्यकता है, जो शहरी क्षेत्रों में न तो व्यावहारिक है और न ही संभव।

इसी समस्या के समाधान के रूप में स्वदेशी तकनीक से विकसित बंकरमैन टेक्नोलॉजी सामने आई है, जिसे मशीनी पेड़ के रूप में बाज़ार में उपलब्ध कराया गया है। यह तकनीक प्राकृतिक पेड़ों का विकल्प बनकर प्रदूषण नियंत्रण में अहम भूमिका निभा सकती है।
वायुमंडलीय विशेषज्ञ मेजर जनरल (डॉ.) श्रीपाल के अनुसार, बंकरमैन टेक्नोलॉजी एक मशीनी पेड़ की तरह कार्य करती है। यह तकनीक CO₂ सहित अन्य प्रदूषणकारी गैसों को अवशोषित कर उन्हें संसाधित करती है और खनिज-युक्त जैविक खाद (Minerals Rich Organic Manure) में परिवर्तित कर देती है, जिससे वातावरण शुद्ध होता है।
उन्होंने बताया कि जहाँ एक प्राकृतिक पेड़ को विकसित होने में कम से कम पाँच वर्ष लगते हैं, वहीं मौजूदा प्रदूषण स्तर को देखते हुए न तो इतना समय उपलब्ध है और न ही पर्याप्त जगह। ऐसे में मशीनी पेड़ एक प्रभावी और त्वरित समाधान साबित हो सकता है।
बंकरमैन टेक्नोलॉजी की खासियत यह है कि जहाँ एक पेड़ लगाने की जगह में 50 या उससे अधिक मशीनी पेड़ लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा, प्राकृतिक पेड़ जहाँ इनडोर स्पेस में नहीं लगाए जा सकते, वहीं इस तकनीक को कमरे के अंदर भी स्थापित किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इनडोर उपयोग से 40 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा की बचत भी संभव है।
गौरतलब है कि बंकरमैन टेक्नोलॉजी को DRDO, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), IIT सहित कई सरकारी संस्थानों से मान्यता प्राप्त है। प्रदूषण के खिलाफ जंग में यह तकनीक भविष्य में एक अहम और कारगर समाधान बनकर उभर सकती है।
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