नई दिल्ली,बदलते वैश्विक परिदृश्य और प्राकृतिक व मानव निर्मित खतरों में लगातार बढ़ोतरी के बीच सुरक्षित और आत्मनिर्भर आवास की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। वायु विशेषज्ञ एवं ‘बंकरमैन’ के प्रमुख मेजर जनरल श्री पाल ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए ऐसे घरों और संरचनाओं का निर्माण समय की मांग बन चुका है, जो आपदा की स्थिति में भी लोगों को पूर्ण सुरक्षा और आवश्यक जीवन सुविधाएँ प्रदान कर सकें।
उन्होंने कहा कि 11 सितंबर 2001 के हमले के बाद वैश्विक स्तर पर सुरक्षा को लेकर नई सोच विकसित हुई। हाल ही में आई कोविड-19 महामारी ने भी यह साबित कर दिया कि लॉकडाउन, आइसोलेशन और बंद वातावरण में सुरक्षित रहना केवल सैद्धांतिक अवधारणा नहीं, बल्कि वास्तविकता है।
मेजर जनरल श्री पाल के अनुसार, भारत सहित कई देशों में बड़े उद्योगपति, कारोबारी और संपन्न परिवार अपने घरों और फार्महाउस को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए सुरक्षित बनाने में निवेश कर रहे हैं। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ‘बंकरमैन’ आधुनिक तकनीक से लैस सुरक्षित आवास और अंडरग्राउंड शेल्टर तैयार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि इन विशेष संरचनाओं में घरों को एयर और गैस-टाइट दरवाजों व खिड़कियों के जरिए पूरी तरह सील किया जाता है, जिससे बायोलॉजिकल या केमिकल खतरे के दौरान दूषित हवा अंदर प्रवेश नहीं कर पाती। जरूरत के अनुसार 7 से 30 दिन तक ‘बटन-अप पीरियड’ के लिए घर के अंदर सुरक्षित वातावरण बनाए रखने की वैज्ञानिक व्यवस्था की जाती है।
इन अत्याधुनिक घरों में HVAC सिस्टम, कार्बन डाइऑक्साइड रिमूवल सिस्टम, ऑक्सीजन रिप्लेनिशमेंट सिस्टम, एडवांस फिल्ट्रेशन सिस्टम, एनवायरनमेंट मॉनिटरिंग सिस्टम (EMS) और बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) जैसे आधुनिक तकनीकी उपकरण लगाए जाते हैं। साथ ही पॉजिटिव ओवर-प्रेशर सिस्टम के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी संभावित लीकेज के बावजूद बाहर की दूषित हवा अंदर प्रवेश न कर सके।
इसके अलावा, भोजन, पानी, ऑक्सीजन, दवाइयाँ, फर्स्ट-एड किट, प्रोटेक्टिव मास्क और स्टैंड-बाय पावर सप्लाई जैसी जरूरी सुविधाओं की भी व्यवस्था की जाती है। ‘बंकरमैन’ इन संरचनाओं के संचालन के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान करता है।
मेजर जनरल श्री पाल ने बताया कि यह तकनीक केवल आपात स्थितियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या के समाधान में भी सहायक है। इस प्रणाली के उपयोग से बिजली की खपत में 40 से 60 प्रतिशत तक कमी आती है। साथ ही, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने पर प्रोत्साहन राशि भी मिलती है, जिससे इसकी लागत कुछ वर्षों में लगभग शून्य हो जाती है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस तकनीक को स्थापित करने की शुरुआती लागत लगभग 5 से 10 लाख रुपये तक आती है, लेकिन दीर्घकालिक लाभ को देखते हुए यह एक किफायती और भविष्य के लिए आवश्यक निवेश है।
अंत में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सुरक्षित और आत्मनिर्भर आवास की अवधारणा तेजी से विकसित होगी और ‘बंकरमैन’ का उद्देश्य लोगों और संस्थानों को ऐसी अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाएँ उपलब्ध कराना है, जो किसी भी संकट की स्थिति में जीवन और संसाधनों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।


