नई दिल्ली-भारत में पशु क्रूरता के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए पशु सुरक्षा के लिए मजबूत और सख्त कानूनों की मांग को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पशुओं—विशेषकर सामुदायिक कुत्तों—के साथ हो रहे दुर्व्यवहार, हिंसा और उपेक्षा के मामलों पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करना और तत्काल कानूनी व सामाजिक सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करना था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य वक्ता डॉ. अनुरूपा रॉय, प्रख्यात पशु कल्याण कार्यकर्ता रहीं। डॉ. रॉय अपने नियमित पेशे के साथ-साथ वर्षों से पशु अधिकारों और कल्याण के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वह इस विषय में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, भारत में इम्प्ली इन पर्सन भी हैं, जिससे उन्हें इस मुद्दे पर प्रत्यक्ष कानूनी अनुभव प्राप्त है।
डॉ. रॉय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले व्यक्तियों, समूहों और समुदायों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ तत्व मुद्दे को सनसनीखेज बनाने के लिए फर्जी आंकड़े और भ्रामक रिपोर्टें तैयार करते हैं। उनके अनुसार, अधिकांश कुत्ते काटने की घटनाएं उकसावे, जबरन स्थानांतरण, अपर्याप्त भोजन और पशु नियंत्रण कार्यक्रमों में भ्रष्टाचार का परिणाम होती हैं।
उन्होंने शोधों का हवाला देते हुए कहा कि पशु क्रूरता, मनुष्यों के खिलाफ होने वाले अपराधों की पूर्वसूचक होती है, और यह प्रवृत्ति भारत में तेजी से बढ़ रही है। डॉ. रॉय ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ जाना नहीं है। उन्होंने सुओ मोटो संज्ञान लेने के लिए न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पशुओं और उनके देखभालकर्ताओं को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामाजिक आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में हर 15 मिनट में एक बलात्कार की रिपोर्ट होती है, गड्ढों के कारण 2,000 से अधिक मौतें होती हैं, जबकि रेबीज शीर्ष 20 राष्ट्रीय स्वास्थ्य चिंताओं में भी शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि हृदय रोग, सड़क दुर्घटनाएं, स्ट्रोक, डायरिया, आत्महत्या, टीबी और कैंसर जैसे मुद्दों पर तत्काल गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।
डॉ. रॉय ने अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने कई विकसित देशों में अध्ययन और कार्य किया है, जहां पशुओं को कहीं अधिक मजबूत कानूनी अधिकार और संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा,
“यदि भारत विकसित देशों की तरह आवारा पशुओं के प्रबंधन की बात करता है, तो उसे उनके जैसे कानून भी बनाने होंगे। फर्जी आंकड़ों, फर्जी टीकाकरण, पशु कल्याण में भ्रष्टाचार—चाहे वह सरकारी हो या निजी एजेंसियों द्वारा—इन सब पर सख्ती से कार्रवाई करनी होगी। जब तक हम उनकी तरह काम नहीं करेंगे, तब तक सिंगापुर बनने का सपना नहीं देख सकते।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पशुओं को समस्या के रूप में नहीं, बल्कि जीवित प्राणी और पारिस्थितिकी तंत्र के अहम हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। डॉ. रॉय उन चुनिंदा इम्प्लीडर्स में से हैं जिन्होंने स्वयं माननीय न्यायाधीशों के समक्ष उपस्थित होकर भारत में फर्जी आंकड़ों के मुद्दे को प्रमाणित किया है, जिसके कारण बीते एक वर्ष से भय का वातावरण बना हुआ था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उन्होंने कहा कि केवल सरकार को अपराधों के लिए दोषी ठहराना उचित नहीं है, क्योंकि कोई भी देश अपराध नहीं सिखाता। अपराध कानून के विरुद्ध है और पिछली सुनवाई में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि पशु देखभालकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार भी एक आपराधिक अपराध है। उन्होंने समाज से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने, विज्ञान और तथ्यों को समझने और पशुओं के प्रति संवेदनशील बनने की अपील की।


