Sunday, March 22, 2026
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Dharmendra – बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र पंचतत्व में विलीन — सनी देओल ने दी मुखाग्नि, सितारों की नम आंखों ने दी आखिरी विदाई

मुंबई हिंदी सिनेमा के इतिहास में शायद ही कोई दिन इतना भारी रहा हो जितना 24 नवंबर का रहा। लाखों दिलों पर राज करने वाले, करोड़ों लोगों की यादों में बसे, बॉलीवुड के ‘ही-मैन’धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। 89 वर्षीय सुपरस्टार ने आज सुबह अपनी अंतिम सांस ली। पिछले कई दिनों से चल रही उनकी तबीयत की जंग आखिरकार हार गई, और आज पूरा देश इस दिग्गज अभिनेता के निधन से शोक में डूब गया।

सुबह से ही मुंबई स्थित उनके निवास पर रिश्तेदारों, परिजनों, दोस्तों और चाहने वालों का तांता लग गया। हर किसी के चेहरे पर गहरी उदासी थी—जिस अभिनेता ने 60 साल तक सिनेमा को अनगिनत सुपरहिट फिल्में दीं, जिसका मुस्कुराना ही लोगों के दिलों को जीत लेता था, वह जा चुका था।

अस्पताल से घर तक—अंतिम सफर की शुरुआत

धर्मेंद्र कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे और डॉक्टर्स की लगातार कोशिशों के बावजूद उनकी हालत बिगड़ती चली गई। सोमवार सुबह लगभग 7:30 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार ने उनका पार्थिव शरीर दोपहर तक बांद्रा स्थित उनके घर लेकर आया, जहां भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया।

चारों तरफ सन्नाटा था, सिर्फ रोने की आवाजें और उनके सदाबहार गीतों की धुनें गूँज रही थीं। ‘करम करदा’, ‘दिल लगे दिल लगे’, ‘मैं जट यमला पगला दीवाना’—लोगों की आंखें इन धुनों को सुनकर और भी नम हो गईं।

हेमा मालिनी—दर्द से टूटा हुआ दिल

धर्मेंद्र की पत्नी और अभिनेत्री हेमा मालिनी पूरी तरह टूट चुकी थीं। अंतिम दर्शन के दौरान वे स्वयं को संभाल नहीं पा रही थीं। उनके चेहरे पर गहरा आघात साफ नजर आ रहा था।
वे बस इतना ही कह सकीं—
“आज सिर्फ मेरा नहीं, पूरे देश का दुख बड़ा है… मैंने अपने जीवनसाथी को खो दिया।”

उनकी दोनों बेटियां—ईशा देओल और अहाना देओल—भी अपने पिता को अंतिम विदाई देते समय खुद पर काबू नहीं रख सकीं।

सनी और बॉबी—बेटों ने निभाया अंतिम फर्ज़

धर्मेंद्र के दोनों बेटे सनी देओल और बॉबी देओल पूरे समय पिता के पार्थिव शरीर के पास बैठे रहे।

दोपहर 3 बजे जब अंतिम यात्रा निकली, तो सनी देओल की आंखें लगातार नम थीं। श्रद्धांजलि देने आए हजारों लोगों के बीच वे चुपचाप बस अपने पिता को निहारते रहे—वह पिता जिसने उन्हें सिर्फ बड़ा अभिनेता ही नहीं, बल्कि मजबूत इंसान बनना भी सिखाया।

अंतिम यात्रा में उमड़ा सिनेमा जगत—अमिताभ से लेकर शाहरुख तक ,धर्मेंद्र की अंतिम यात्रा में बॉलीवुड के लगभग सभी बड़े सितारे शामिल हुए।

अमिताभ बच्चन – धर्मेंद्र के सबसे करीबियों में से एक रहे बिग बी आंखों में आंसू लिए पहुंचे। उन्होंने कहा—
“धर्म जी सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री के स्टार नहीं थे, वे हमारे परिवार का हिस्सा थे। उनके जाने से एक युग खत्म हो गया।”

सलमान खान – सलमान खान, जो बचपन से ही धर्मेंद्र को ‘धर्म पाजी’ कहते आए हैं, पूरी तरह टूटे हुए दिखे। वे लंबे समय तक उनकी तस्वीर के सामने खड़े होकर रोते रहे।

शाहरुख खान – शाहरुख ने धर्मेंद्र के पार्थिव शरीर को हाथ लगाकर कहा—”आपने हम सबको इंसानियत सिखाई। आप हमेशा हमारे दिल में रहेंगे, पाजी।”

रणबीर कपूर, अजय देवगन, अक्षय कुमार, अनिल कपूर, दीपिका पादुकोण, कंगना रनौत, राणा दग्गुबाती समेत कई सितारे उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।

पिता को दी मुखाग्नि — सनी देओल का कांपता हुआ हाथ

शाम 5 बजे मुंबई के विले पार्ले श्मशान घाट में धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार हुआ।
मंत्रोच्चार के बीच जब पिता को मुखाग्नि देने का समय आया, तो सनी देओल कई बार टूटे, लेकिन उन्होंने स्वयं को संभाला। उनका हाथ कांप रहा था, आँसू लगातार गिर रहे थे—लेकिन बेटे ने अपने पिता को अंतिम विदाई दी।

इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। श्मशान घाट में एक ऐसा मौन छा गया जैसे समय ठहर गया हो।

पूरे देश की आंखें नम—सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि की बाढ़

धर्मेंद्र के निधन की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि की लहर दौड़ गई।
हर कोई अपने-अपने तरीके से इस महान अभिनेता को याद कर रहा था—
“सादगी की मूर्ति”
“दिलों का बादशाह”
“बॉलीवुड का सबसे हैंडसम हीरो”
“धरती का ही-मैन”

देश के प्रधानमंत्री, कई मुख्यमंत्रियों, खेल जगत, कला जगत, राजनीति और साहित्य की हस्तियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

60 साल का सफर—300 से अधिक फिल्में, हर दिल में जगह

धर्मेंद्र का फिल्मी सफर किसी दंतकथा से कम नहीं था।

उनकी यादगार फिल्में—शोले (1975) चुपके चुपके (1975) यकीन (1969) अनुपमा (1966) धरम वीर (1977) राजा जानी (1972) सत्यकाम (1969)यमला पगला दीवाना (2011)

वे एक ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने एक्शन, रोमांस, कॉमेडी, ट्रेजडी—हर किरदार में जान डाल दी।

उनकी मुस्कान और सादगी का कोई मुकाबला नहीं था। यही कारण है कि धर्मेंद्र सिर्फ स्टार नहीं थे, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव थे—एक ऐसा नाम जिससे पूरा देश प्यार करता था।

धर्मेंद्र—एक इंसान, एक पिता, एक पति, एक दोस्त

फिल्मों से अलग, धर्मेंद्र अपने दरियादिल स्वभाव के लिए भी जाने जाते थे।
उनके करीबियों का कहना है कि—

वे कभी किसी को दुख नहीं देना चाहते थे।
उन्होंने जिंदगी भर उन लोगों का साथ निभाया जो उनके साथ शुरुआत से खड़े थे।
वे दिल से गांव के आदमी थे, और आजीवन जमीन से जुड़े रहे।
उनकी सादगी की कहानियाँ आज भी इंडस्ट्री में मिसाल मानी जाती हैं।

राष्ट्रीय नुकसान—सिनेमा का एक सुनहरा अध्याय खत्म

धर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे—वे एक युग थे।एक ऐसा युग जिसने हिंदी सिनेमा को नई दिशा दी, नए आयाम दिए, और यह सिखाया कि अभिनेता होना सिर्फ कैमरे के सामने एक्टिंग करना नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में जगह बनाना है।

आज धर्मेंद्र पंचतत्व में विलीन हो गए, लेकिन उनकी स्मृतियाँ हमेशा जीवित रहेंगी।

अंतिम विदाई—‘ही-मैन’ अमर रहे

श्मशान घाट से लौटते समय हर कोई बस यही कह रहा था— “एक सितारा टूट गया… लेकिन वह हमारे दिलों में हमेशा चमकता रहेगा।”
धर्मेंद्र भले इस दुनिया से चले गए हों, लेकिन हिंदी सिनेमा में उनका योगदान, उनका प्यार, उनकी मुस्कान, और उनकी यादें हमेशा अमर रहेंगी।

 

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