नई दिल्ली — ज़ाइडस के प्रवक्ता डॉ. मनीष सिंघल ने स्तन कैंसर (ब्रेस्ट कैंसर) को लेकर बढ़ती चिंताओं पर बात करते हुए कहा कि यह आज महिलाओं में पाए जाने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक बन चुका है। भारत में बड़ी संख्या में मामले अब भी देर से सामने आते हैं, जिससे इलाज चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में जागरूकता, समय पर जांच और सही जानकारी बेहद ज़रूरी है।

डॉ. सिंघल के अनुसार, स्तन कैंसर किसी भी उम्र की महिला को हो सकता है, हालांकि 40 वर्ष की आयु के बाद इसका जोखिम बढ़ जाता है। इसके प्रमुख जोखिम कारकों में पारिवारिक इतिहास, जेनेटिक कारण (BRCA1/BRCA2), हार्मोनल बदलाव, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान और शराब सेवन शामिल हैं। शहरी जीवनशैली और देर से मातृत्व भी जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि शुरुआती पहचान से स्तन कैंसर का इलाज अधिक सफल हो जाता है। नियमित सेल्फ ब्रेस्ट एग्ज़ामिनेशन, डॉक्टर द्वारा क्लिनिकल जांच और जरूरत अनुसार मैमोग्राफी कराना बेहद अहम है। शुरुआती चरण में पकड़े गए मामलों में इलाज कम जटिल होता है और रिकवरी की संभावना भी अधिक रहती है।
डॉ. सिंघल ने बताया कि स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों में स्तन या बगल में गांठ, स्तन के आकार या त्वचा में बदलाव, निप्पल से असामान्य स्राव, त्वचा का धंसना या लाल होना** शामिल हो सकता है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक आम मिथक है कि स्तन कैंसर हमेशा दर्द के साथ होता है, जबकि कई मामलों में शुरुआत में दर्द नहीं होता। एक और भ्रांति यह है कि कैंसर का मतलब जीवन का अंत है, जबकि आधुनिक चिकित्सा ने इसे काफी हद तक नियंत्रण योग्य बीमारी बना दिया है।

डॉ. मनीष सिंघल ने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर स्तन कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, धूम्रपान और शराब से दूरी जैसे उपाय मददगार हैं।
इसके साथ ही उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य पर भी ज़ोर दिया। कैंसर का डर, इलाज का तनाव और सामाजिक दबाव मरीज और परिवार दोनों को प्रभावित करता है, इसलिए काउंसलिंग, परिवार का सहयोग और सपोर्ट ग्रुप्स बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आज स्तन कैंसर के इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं। डॉ. सिंघल ने बताया कि आधुनिक तकनीकों और दवाओं के चलते इलाज अब पहले से ज्यादा व्यक्तिगत, प्रभावी और सुरक्षित हो गया है।नई रिसर्च और मेडिकल इनोवेशन के कारण मरीजों की जीवन गुणवत्ता और जीवित रहने की दर में लगातार सुधार हो रहा है।
डॉ. मनीष सिंघल ने अपने संदेश में कहा कि स्तन कैंसर से डरने की नहीं, बल्कि समझदारी और जागरूकता से लड़ने की ज़रूरत है। समय पर जांच, सही जानकारी, स्वस्थ जीवनशैली और आधुनिक इलाज के साथ स्तन कैंसर को हराया जा सकता है। उन्होंने सभी महिलाओं से अपील की कि वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और किसी भी लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें।


