Sunday, March 22, 2026
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दिल्ली सुनेगी शिव की वाणी, हर हृदय में जागेगा कैलाश,स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज के सान्निध्य में होगी सात दिवसीय शिव महापुराण कथा

नई दिल्ली – राजधानी दिल्ली इस नवंबर एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव की साक्षी बनने जा रही है। श्री केदारनाथ मंदिर ट्रस्ट, दिल्ली के तत्वावधान में 17 से 23 नवंबर 2025 तक डीडीए ग्राउंड, मियावाली नगर, पश्चिम विहार में सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा।

इस कथा का वाचन परम पूज्य निरंजन पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज द्वारा किया जाएगा। यह पहली बार होगा जब स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज दिल्ली की भूमि पर शिव महापुराण कथा का अमृत बरसाएँगे।

इस आयोजन की घोषणा न्यू महाराष्ट्र सदन, के.जी. मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान की गई, जिसमें प्रमुख मीडिया प्रतिनिधि, श्रद्धालु और आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

इस अवसर पर स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज ने कहा,

> “शिव महापुराण कथा केवल धर्म का वर्णन नहीं, बल्कि चेतना के जागरण का माध्यम है। जब मनुष्य शिव की कथा सुनता है, तो वह अपने भीतर के शिव को जागृत करता है। यह कथा अंधकार को प्रकाश में और पाप को पुण्य में बदलने की शक्ति रखती है।”

कार्यक्रम के दौरान नटराज नृत्य, सती कथा, गंगा अवतरण,मृदंग साधना और शंखनाद जैसी दिव्य प्रस्तुतियाँ हर दिन श्रद्धालुओं को भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रदान करेंगी। प्रतिदिन चार से पाँच हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक नरेश कुमार एरन ने कहा कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण की यात्रा है।

> “जब शिव महापुराण कथा दिल्ली में गूँजेगी, तो हर व्यक्ति के भीतर भक्ति और शांति की नई लहर उठेगी,” उन्होंने कहा।

वहीं,श्री केदारनाथ मंदिर ट्रस्ट, दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र रौतेला ने बताया,

> “हमारे लिए यह गर्व का क्षण है कि स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज के सान्निध्य में राजधानी में पहली बार इतनी भव्य शिव कथा का आयोजन हो रहा है। ट्रस्ट का उद्देश्य केवल मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि समाज में अध्यात्म और सेवा का प्रसार करना है।”

यह सात दिवसीय शिव महापुराण कथा दिल्ली में भक्ति, ज्ञान और संस्कृति का एक ऐतिहासिक संगम सिद्ध होगी। श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव होगा मानो स्वयं कैलाश से भगवान शिव राजधानी में पधारे हों।

 

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