नई दिल्ली। सूफ़ी सिलसिले के बेशुमार अकीदतमंदों ने हज़रत महबूब-ए-इलाही हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह अलैह का 811वां गुस्ल-ए-शरीफ़ दरगाह शरीफ़ पर पूरी अकीदत और मोहब्बत के साथ मनाया। इस मौके पर देश-विदेश से आए ज़ायरीन ने दरगाह पर हाज़िरी दी और दुआएँ मांगी।

दरगाह के चेयरमैन सैयद अफ़सर अली निज़ामी ने जानकारी देते हुए बताया कि हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह अलैह, जिन्हें “महबूब-ए-इलाही” के नाम से भी जाना जाता है, का 811वां गुस्ल-ए-शरीफ़ इस बार भी पारंपरिक तौर-तरीक़ों से अदा किया गया। सुबह से ही दरगाह शरीफ़ पर अकीदतमंदों का तांता लगा रहा। गुस्ल की रस्म अदायगी के दौरान कुरानख़्वानी और नातख़्वानी हुई।
गुस्ल-ए-शरीफ़ के बाद दरगाह शरीफ़ पर चादरपोशी की गई। इस अवसर पर मिलाद शरीफ़ और महफ़िल-ए-समाअ का भी आयोजन किया गया, जिसमें क़व्वालों ने सूफ़ियाना कलाम पेश किए और दरगाह का माहौल रूहानियत से भर उठा।
कार्यक्रम के दौरान अकीदतमंदों के लिए लंगर शरीफ़ का भी इंतज़ाम किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। दरगाह की गलियों में देश-विदेश से आए ज़ायरीन की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह अलैह की मोहब्बत और इंसानियत का पैग़ाम आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा है।
सैयद अफ़सर अली निज़ामी ने कहा कि हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह अलैह ने अपनी ज़िंदगी में मोहब्बत, अमन और भाईचारे का पैग़ाम दिया, और आज भी उनकी दरगाह इंसानियत और सूफ़ी विचारधारा का केंद्र बनी हुई है। उन्होंने दुआ की कि मुल्क और पूरी दुनिया में अमन, भाईचारा और इंसानी मोहब्बत कायम रहे।


