Wednesday, February 4, 2026
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KIBG 2026 में अनुराग सिंह और अश्मिता चंद्रा ने जीता स्वर्ण, भारत में ओपन वॉटर स्विमिंग को मिल

दीव(जीतेन्द्र शर्मा): ओपन वॉटर या समुद्री तैराकी का नाम आते ही अब तक इसे साहसिक अभियानों से जोड़कर देखा जाता रहा है। मिहिर सेन और बुला चौधरी जैसे दिग्गजों ने दशकों पहले इंग्लिश चैनल पार कर इस खेल को पहचान दिलाई थी। लेकिन अब यह खेल एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां अभियान नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धा केंद्र में है।

खेलो इंडिया बीच गेम्स (KIBG) 2026 में ओपन वॉटर स्विमिंग ने इसी बदलाव की झलक दिखाई, जब उत्तर प्रदेश के अनुराग सिंह और कर्नाटक की अश्मिता चंद्रा ने पुरुष और महिला 10 किलोमीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

पूल से समुद्र तक का सफर
ओपन वॉटर स्विमिंग को 2008 बीजिंग ओलंपिक में आधिकारिक खेल के रूप में शामिल किए जाने के बाद से इसमें प्रतिस्पर्धात्मक दृष्टिकोण बढ़ा है। अब पूल में 1500 मीटर तक सीमित रहने वाले तैराक 5 किमी और 10 किमी जैसी लंबी दूरी की समुद्री रेस में उतर रहे हैं।
KIBG 2026 में अनुराग सिंह ने 2 घंटे 22 मिनट 02 सेकंड का समय लेकर पुरुष वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जबकि अश्मिता चंद्रा ने 2 घंटे 46 मिनट 34 सेकंड में रेस पूरी कर महिला वर्ग में पहला स्थान हासिल किया। दोनों खिलाड़ी इससे पहले खेलो इंडिया यूथ गेम्स और यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीत चुके हैं।

समुद्र की चुनौती, तकनीक का इम्तिहान
अश्मिता चंद्रा, जो चार ओपन वॉटर वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी हैं, कहती हैं, “समुद्र में लहरें और ज्वार-भाटा सबसे बड़ी चुनौती होते हैं। एक चक्कर में ही हमें पानी की दिशा समझनी होती है और फिर उसी के हिसाब से अपनी रफ्तार तय करनी पड़ती है।”

वहीं अनुराग सिंह मानते हैं कि समुद्री तैराकी अभी उनके लिए नई है। “मैं दिल्ली में ट्रेनिंग करता हूं, वहां समुद्र नहीं है। इसलिए अब तक मेरी पूरी तैयारी पूल में ही हुई है,” उन्होंने कहा।

आयोजन भी बड़ी चुनौती
KIBG 2026 के प्रतियोगिता प्रबंधक राहुल चिपलुंकर के अनुसार, समुद्र में प्रतियोगिता आयोजित करना आसान नहीं होता।
“हमें एक महीने पहले टाइड टेबल का अध्ययन करना पड़ता है। कम ज्वार-भाटे के समय ही रेस कराई जाती है, ताकि तैराकों को अत्यधिक करंट का सामना न करना पड़े,” उन्होंने बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री पानी में ग्लाइड अधिक होती है, जिससे स्ट्रोक्स भी पूल से अलग हो जाते हैं और तैराकों को दिशा पहचानने की विशेष ट्रेनिंग लेनी पड़ती है।

बढ़ती भागीदारी, उज्ज्वल भविष्य
KIBG में ओपन वॉटर स्विमिंग के प्रति बढ़ती रुचि इसका सबसे बड़ा संकेत है।
पहले दीव बीच गेम्स में लगभग 40 तैराक थे
पहले खेलो इंडिया बीच गेम्स में 50 प्रतिभागी
और अब KIBG 2026 में 70 तैराक हिस्सा ले रहे हैं
चिपलुंकर का मानना है कि भारत की लंबी समुद्री तटरेखा इस खेल के लिए वरदान है।
“गोवा और कर्नाटक का समुद्र काफी शांत है और ओपन वॉटर स्विमिंग के लिए आदर्श है। अगर समुद्र में ट्रेनिंग से जुड़ी अनुमतियों की समस्या सुलझ जाए, तो भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई तैराक तैयार कर सकता है।”

अभियान से पदक तक का सफर
कभी रिकॉर्ड बनाने और समुद्र पार करने तक सीमित रही ओपन वॉटर स्विमिंग अब ओलंपिक और राष्ट्रीय पदकों की दौड़ बन चुकी है। KIBG 2026 में अनुराग और अश्मिता की सफलता इस बात का संकेत है कि भारत में यह खेल अब मजबूती से अपनी जगह बना रहा

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