कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के साथ साझेदारी में आयोजित जावा-येज़्दी मोटरसाइकल्स की ‘शौर्य विजय यात्रा’ का सोमवार को द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर भावपूर्ण समापन हुआ। नई दिल्ली के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से शुरू हुई करीब 1,900 किलोमीटर लंबी इस यात्रा ने कारगिल युद्ध के वीर नायकों के अदम्य साहस, समर्पण और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस विशेष अभियान में सेवारत और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, वीर नारियां, शहीदों के परिजन और देशभर से जुड़े सिविलियन राइडर्स एक साथ शामिल हुए। यात्रा का उद्देश्य केवल एक स्मृति राइड तक सीमित नहीं था, बल्कि देशवासियों को भारतीय सैनिकों की वीरगाथाओं से जोड़ना और सेवा, कर्तव्य तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी था।
इस यात्रा का सबसे भावुक और प्रतीकात्मक क्षण वह रहा जब नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की पवित्र मिट्टी को द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक लाया गया। यह पहल उन सैनिकों की विभिन्न पीढ़ियों के बीच एक भावनात्मक सेतु का प्रतीक बनी, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के कठिन पर्वतीय मार्गों से गुजरते हुए प्रतिभागियों ने चंडीमंदिर, रेज़ांग ला और लेह युद्ध स्मारक सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य स्थलों पर श्रद्धांजलि अर्पित की। चुनौतीपूर्ण रास्तों और ऊंचे पहाड़ी दर्रों को पार करते हुए यह यात्रा अंततः द्रास पहुंची, जहां कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को नमन किया गया।
वर्ष 2021 में शुरू हुई इस पहल की परिकल्पना जावा-येज़्दी मोटरसाइकल्स ने की थी। इसका उद्देश्य भारतीय सैनिकों की प्रेरणादायक कहानियों को सैन्य परिसरों से बाहर निकालकर आम जनता तक पहुंचाना है। समय के साथ यह अभियान एक ऐसे नागरिक-सैन्य आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें राइडिंग समुदाय, पूर्व सैनिक, वीर नारियां और शहीदों के परिवार मिलकर साहस, कर्तव्य और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।
इस वर्ष की शौर्य विजय यात्रा को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यात्रा में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और विशेष आमंत्रित अतिथियों की भागीदारी ने इस अभियान के बढ़ते महत्व और राष्ट्रीय स्मरण में इसकी भूमिका को और अधिक मजबूत किया।
पूरी यात्रा जावा और येज़दी मोटरसाइकिलों के बेड़े पर पूरी की गई, जिनमें जावा 350, जावा 42, जावा 42 एफजे, येज़दी एडवेंचर और येज़दी स्क्रैम्बलर शामिल थीं। कठिन पहाड़ी रास्तों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इन मोटरसाइकिलों ने राइडर्स का साथ निभाया और इस ऐतिहासिक यात्रा को सफल बनाया।
क्लासिक लेजेंड्स के सह-संस्थापक अनुपम थरेजा ने कहा कि “शौर्य विजय यात्रा यह सुनिश्चित करने का हमारा प्रयास है कि भारत के वीर सपूतों की कहानियां आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहें। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से द्रास तक का हर किलोमीटर उन सैनिकों को समर्पित था जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। भारतीय सेना, सेवारत एवं सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों, वीर नारियों और सिविलियन राइडर्स के साथ मिलकर इस श्रद्धांजलि का हिस्सा बनना हमारे लिए गर्व की बात है। हमारी कामना है कि साहस, सेवा और राष्ट्रप्रेम के ये मूल्य आने वाली पीढ़ियों तक इसी तरह पहुंचते रहें।”


