नई दिल्ली:भारत दौरे पर आए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दिल्ली में भारतीय धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और कारोबारी जगत से जुड़े प्रमुख लोगों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और मानव गरिमा को लेकर ईरान के दृष्टिकोण को सामने रखा। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी प्रकार के उत्पीड़न और दबाव के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा।
पेजेशकियन ने कहा कि ईरान का उद्देश्य ऐसा समाज बनाना है, जहां सभी इंसान स्वतंत्र रूप से और बिना उत्पीड़न तथा शोषण के जीवन जी सकें। उन्होंने कहा कि इसके लिए विभिन्न देशों और समाजों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान आवश्यक है।
अपने संबोधन में अमेरिकी नीतियों का उल्लेख करते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि अमेरिका ईरान की स्वतंत्रता और अपने लोगों को सेवाएं प्रदान करने की क्षमता को प्रभावित करने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी स्वतंत्रता को बनाए रखना चाहता है और इसी कारण उस पर दबाव बनाया जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि ईरानी क्रांति की सफलता के बाद से ही देश को विभाजित करने, प्रतिबंध लगाने और समाज में मतभेद पैदा करने के प्रयास किए जाते रहे हैं। उनके अनुसार, बाहरी ताकतें समाज में discord और विभाजन के बीज बोकर अपने हितों को आगे बढ़ाना चाहती हैं।
पेजेशकियन ने समानता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर देते हुए कहा कि सभी लोग समान हैं और उन्हें समान अधिकार प्राप्त होने चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय के आधार पर विभिन्न समुदाय और समाज शांतिपूर्ण तरीके से साथ रह सकते हैं और यही वह व्यवस्था है जिसकी ईरान तलाश कर रहा है।
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ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका देश दबाव और वर्चस्व की नीतियों के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जब कोई देश सत्य और न्याय की तलाश में आगे बढ़ता है, तो उसे दबाव, धमकी और अहंकार के सामने आत्मसमर्पण नहीं करना चाहिए।
पेजेशकियन का यह संबोधन ऐसे समय में हुआ है जब भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। दिल्ली में भारतीय धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और व्यापारिक समुदाय के साथ उनकी बातचीत को दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संवाद, आपसी समझ और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।


