दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, बैंक मैनेजर समेत 10 गिरफ्तार; 248 बैंक अकाउंट किट, फर्जी कंपनियों की मुहरें, सिम कार्ड और मोबाइल बरामद
नई दिल्ली। महज ₹10 हजार की साइबर ठगी की शिकायत ने दिल्ली पुलिस को ऐसे नेटवर्क तक पहुंचा दिया, जिसने देशभर में फैले ₹70 करोड़ से ज्यादा के साइबर ट्रांजैक्शन वाले एक बड़े ‘म्यूल अकाउंट सिंडिकेट’ का भंडाफोड़ कर दिया। जांच में खुलासा हुआ कि फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनकी पूरी बैंकिंग किट देश और विदेश में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाई जा रही थी। इस मामले में बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत भी सामने आई है।
- सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर थाना पुलिस ने इस कार्रवाई में सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के एक शाखा प्रबंधक समेत 10 लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया है। इनमें इंडसइंड बैंक के मैनेजर, डिप्टी मैनेजर, बैंक टेलर और एक इंश्योरेंस एजेंट भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह पिछले तीन-चार वर्षों से सक्रिय था और इसके तार भारत के अलावा दुबई और यूनाइटेड किंगडम तक जुड़े मिले हैं।

₹10 हजार की शिकायत से खुलने लगी परतें
पूरे मामले की शुरुआत पटेल नगर निवासी एक युवक से हुई, जिसे सोशल मीडिया पर वर्क फ्रॉम होम का झांसा देकर रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ₹10 हजार ठग लिए गए। जब साइबर थाना पुलिस ने रकम की डिजिटल ट्रेल खंगाली तो वह कई खातों से गुजरते हुए ‘डेमियन ट्रेडर्स’ नाम की एक फर्जी फर्म के खाते तक पहुंची। यहीं से जांच ने बड़ा मोड़ लिया और पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हो गईं।
ऐसे तैयार होती थी ‘बैंक अकाउंट किट’
जांच में सामने आया कि गिरोह पहले लोगों के दस्तावेज हासिल करता था। इसके बाद उनके नाम पर शेल कंपनियां बनाकर विभिन्न बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से केवाईसी नियमों को नजरअंदाज किया जाता और फिर एक पूरी ‘बैंक अकाउंट किट’ तैयार की जाती थी। इस किट में डेबिट कार्ड, चेक बुक, पासबुक, इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी, रजिस्टर्ड सिम और फर्जी कंपनी की रबर स्टैंप तक शामिल होती थी। बाद में इन्हें मोटी रकम लेकर साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था।
बैंक अधिकारियों पर भी शिकंजा
पुलिस के अनुसार, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के गुरुग्राम शाखा प्रबंधक ने एक फर्जी खाता खुलवाने के बदले ₹75 हजार की रिश्वत ली थी, जिसमें ₹55 हजार सीधे उसके निजी खाते में ट्रांसफर किए गए। वहीं इंडसइंड बैंक की द्वारका शाखा के मैनेजर, डिप्टी मैनेजर, बैंक टेलर और एक इंश्योरेंस एजेंट की भूमिका भी जांच में सामने आई है।
शालीमार बाग में मिला साइबर नेटवर्क का अड्डा
पुलिस ने शालीमार बाग स्थित एक ठिकाने पर छापा मारकर भारी मात्रा में सामान बरामद किया। इनमें 248 बैंक अकाउंट किट, 55 डेबिट-क्रेडिट कार्ड, 38 सिम कार्ड, 22 मोबाइल फोन, 28 फर्जी कंपनियों की रबर स्टैंप, ₹1 लाख नकद और एक मारुति ब्रेजा कार शामिल है।
19 राज्यों के 156 साइबर मामलों से जुड़ा नेटवर्क
वित्तीय जांच में सामने आया कि बरामद खातों का संबंध देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 156 साइबर अपराध मामलों से है। इन मामलों में लोगों से ₹20 करोड़ से अधिक की ठगी की गई, जबकि इन खातों के जरिए ₹70 करोड़ से ज्यादा की रकम ट्रांजिट हुई। पुलिस अब तक ₹56 लाख की राशि फ्रीज करा चुकी है।
दुबई से संचालित हो रहा था नेटवर्क
जांच में यह भी पता चला कि गिरोह का मुख्य सरगना दुबई में बैठकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था, जबकि भारत में उसका सहयोगी अलग-अलग राज्यों में बैंक खाते तैयार कर साइबर ठगों तक पहुंचाता था। दोनों फरार आरोपियों की तलाश जारी है और उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया है।
डीसीपी की अपील
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना आधार, पैन, बैंक खाता, चेक बुक, डेबिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी या सिम कार्ड उपलब्ध न कराएं। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, इस तरह के मामलों में लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर बैंक अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी


