आज के दौर में कैंसर केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के लिए भावनात्मक, मानसिक और आर्थिक संघर्ष का नाम बन चुका है। हर दिन अनेक लोग इस गंभीर बीमारी से जूझते हुए जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे समय में समाज के हर सक्षम व्यक्ति और संस्था की जिम्मेदारी बनती है कि वह कैंसर पीड़ितों के साथ खड़ा हो, उन्हें सहारा दे और उम्मीद का हाथ थामे। इसी सामाजिक संवेदना और मानवीय सोच का जीता-जागता उदाहरण है “कुलश्रेष्ठ कैंसर केयर चैरिटेबल ट्रस्ट”, जो वर्षों से जरूरतमंद कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बनकर कार्य कर रहा है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे जरूरतमंद मरीजों के लिए “कुलश्रेष्ठ कैंसर केयर चैरिटेबल ट्रस्ट” आज उम्मीद की एक मजबूत किरण बनकर सामने आ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर कैंसर मरीजों को सहायता, जागरूकता और उपचार सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित यह ट्रस्ट लगातार समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।
इस ट्रस्ट की प्रेरणा स्वर्गीय डॉ. यतेन्द्र कुलश्रेष्ठ की संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा से जुड़ी हुई है। डॉ. यतेन्द्र कुलश्रेष्ठ ने स्वयं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़कर जिंदगी की नई शुरुआत की थी। उपचार के दौरान उन्होंने करीब से महसूस किया कि देश में अनेक गरीब मरीज केवल आर्थिक अभाव के कारण समय पर इलाज नहीं करा पाते और जिंदगी हार जाते हैं। इसी पीड़ा ने उनके भीतर समाज के लिए कुछ करने का संकल्प जगाया।
वर्ष 2012 में परिवार के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने परिजनों और करीबी लोगों के सामने कैंसर पीड़ितों की सहायता के लिए एक चैरिटेबल ट्रस्ट बनाने का प्रस्ताव रखा। परिवारजनों और सामाजिक सहयोगियों ने इस मानवीय सोच का समर्थन किया और 8 जुलाई 2013 को “कुलश्रेष्ठ कैंसर केयर चैरिटेबल ट्रस्ट” की स्थापना की गई।
आज भले ही डॉ. यतेन्द्र कुलश्रेष्ठ इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका सपना और सेवा का मिशन लगातार आगे बढ़ रहा है। इस मिशन को उनकी धर्मपत्नी डॉ. श्रीमती योग्यता कुलश्रेष्ठ पूरी शिद्दत और समर्पण के साथ आगे बढ़ा रही हैं। वहीं उनकी पुत्री डॉ. पीयूषा कुलश्रेष्ठ (कैंसर विशेषज्ञ) भी ट्रस्ट की गतिविधियों को निरंतर संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। डॉ. पीयूषा कुलश्रेष्ठ कैंसर मरीजों और उनके परिवारों की सहायता, जागरूकता कार्यक्रमों और स्वास्थ्य परामर्श अभियानों को आगे बढ़ाने में लगातार सक्रिय हैं।
परिवारजनों, मित्रों और समाज के सहयोग से यह ट्रस्ट निरंतर सेवा कार्यों में जुटा हुआ है। सीमित संसाधनों के बावजूद संस्था ने अनेक जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक सहायता, उपचार सहयोग और मानसिक संबल प्रदान किया है।
ट्रस्ट का मानना है कि कैंसर से लड़ाई केवल दवाइयों से नहीं, बल्कि जागरूकता, समय पर जांच और सामाजिक सहयोग से भी जीती जा सकती है। इसी सोच के साथ संस्था समय-समय पर कैंसर जागरूकता शिविर, स्वास्थ्य परामर्श कार्यक्रम और सहायता अभियान आयोजित करती रही है।
इसी क्रम में अब ट्रस्ट कैंसर स्क्रीनिंग और कैंसर रोकथाम के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) की समय रहते पहचान और बचाव को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक शुक्रवार को मेट्रो हॉस्पिटल प्रीत विहार एवं नोएडा सेक्टर 11 में नि:शुल्क एलबीसी एवं एचपीवी को-टेस्टिंग (पैप स्मीयर जांच) शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
इन जांचों की वास्तविक लागत लगभग 4,000 रुपये प्रति जांच है, लेकिन “कुलश्रेष्ठ कैंसर केयर चैरिटेबल ट्रस्ट” द्वारा इन सभी जांचों का पूरा खर्च स्वयं वहन किया जा रहा है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निःशुल्क जांच सुविधा मिल सके। इन जांचों का उद्देश्य महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान कर समय पर उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि गंभीर स्थिति से पहले ही बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।
संस्था का प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं तक जागरूकता और निःशुल्क जांच की सुविधा पहुंचे, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को समय रहते रोका जा सके। इसके साथ ही ट्रस्ट भविष्य में महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों के लिए भी विशेष स्वास्थ्य परामर्श एवं कैंसर रोकथाम अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है।
संस्था कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जांच और कैंसर संबंधी टेस्ट निशुल्क कराने की दिशा में भी कार्य कर रही है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोग समय रहते अपनी जांच करा सकें और गंभीर बीमारियों से बचाव संभव हो सके।
परिवार और समाज के आपसी सहयोग से संचालित यह ट्रस्ट आज उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद का सहारा बन रहा है, जो आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित रह जाते हैं। “कुलश्रेष्ठ कैंसर केयर चैरिटेबल ट्रस्ट” स्वर्गीय डॉ. यतेन्द्र कुलश्रेष्ठ के उस सपने को आगे बढ़ा रहा है, जिसमें हर जरूरतमंद कैंसर मरीज तक मदद, संवेदना और उम्मीद पहुंचाने की भावना शामिल थी।


