नई दिल्ली अंगदान के बाद नई जिंदगी पाने वाले खिलाड़ियों के हौसले और जज्बे को दुनिया के सामने पेश करने वाले World Transplant Games 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। पराशर फाउंडेशन की पहल ORGAN India ने Manav Rachna Educational Institutions के मानव रचना स्पोर्ट्स साइंस इंस्टीट्यूट और O.P. Bhalla Foundation के सहयोग से भारतीय ट्रांसप्लांट एथलीटों के लिए अब तक का सबसे बड़ा राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया। इस शिविर का उद्देश्य भारतीय खिलाड़ियों को वर्ष 2027 में बेल्जियम के ल्यूवेन में होने वाले विश्व ट्रांसप्लांट खेलों के लिए तैयार करना है।
27 जून से 4 जुलाई 2026 तक आयोजित इस आठ दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में देशभर से 37 ट्रांसप्लांट एथलीटों ने भाग लिया। इनमें 18 से अधिक नए खिलाड़ी पहली बार शामिल हुए। World Transplant Games Federation ने ORGAN India को भारत के लिए आधिकारिक टीम मैनेजर और कंट्री रिप्रेजेंटेटिव नियुक्त किया है। संस्था इस बार 70 से अधिक सदस्यों वाली अब तक की सबसे बड़ी भारतीय टीम को वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में भेजने की तैयारी कर रही है। यह लगातार तीसरी बार होगा जब ORGAN India भारतीय टीम के प्रबंधन और समन्वय की जिम्मेदारी निभाएगा।
शिविर में खिलाड़ियों को बैडमिंटन, वॉलीबॉल और टेबल टेनिस जैसे खेलों के लिए आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इसमें फिटनेस असेसमेंट, तकनीकी प्रशिक्षण, प्रदर्शन विश्लेषण और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के माध्यम से खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए तैयार किया गया।
प्रशिक्षण शिविर में कई ऐसे खिलाड़ी शामिल हुए जिन्होंने अपनी प्रेरणादायक उपलब्धियों से देश का नाम रोशन किया है। इनमें Ramdev Singh प्रमुख रहे, जिन्होंने World Transplant Games 2025 में चार पदक जीते थे और जिनका उल्लेख प्रधानमंत्री ने Mann Ki Baat में भी किया था।
इसी तरह Dr. Jaskaran Singh, जिन्होंने अपनी पत्नी को किडनी दान की और वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स 2025 में पांच पदक जीतकर ‘डोनर एथलीट ऑफ द टूर्नामेंट’ का सम्मान हासिल किया, भी इस शिविर का हिस्सा बने।
इसके अलावा 24 वर्ष पहले लीवर ट्रांसप्लांट करा चुकीं 60 वर्ष से अधिक आयु की Swati Kapre, पदक विजेता Vivek Chaudhary, किडनी डोनर Brother Lawrence Nadar, किडनी प्राप्तकर्ता Robin Nadar तथा टीम के सबसे युवा सदस्य 16 वर्षीय Manav Chaudhary ने भी भाग लिया।
राजस्थान से सबसे बड़ा दल इस शिविर में पहुंचा, जिसमें पूर्व पदक विजेता भवानी सिंह, सतबीर सिंह, अंकित कुमार, अमित कुमार शर्मा, हितेश शर्मा और हर्ष वर्धन सिंह शामिल रहे। वहीं महाराष्ट्र से भी पांच खिलाड़ी प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए। शिविर की एक विशेष बात यह भी रही कि इसमें दो ऐसे दंपती शामिल हुए जिनमें पतियों ने अपनी पत्नियों को किडनी दान की थी।
पराशर फाउंडेशन की चेयरपर्सन और ORGAN India की संस्थापक Anika Parashar ने कहा कि वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स ने भारत को यह दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है कि अंगदान के बाद जीवन में कितनी नई संभावनाएं खुल सकती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि खिलाड़ियों की प्रेरक कहानियां अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करेंगी।
मानव रचना एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं CEO Rajeev Kapoor ने कहा कि संस्थान को लगातार दूसरी बार इस प्रशिक्षण शिविर की मेजबानी करने पर गर्व है और उनका उद्देश्य खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण देकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए तैयार करना है।
ORGAN India की CEO Sunayana Singh ने कहा कि शिविर में शामिल प्रत्येक खिलाड़ी की कहानी अंगदान और ट्रांसप्लांट के बाद नई जिंदगी की प्रेरक मिसाल है, जो समाज की सोच बदलने की क्षमता रखती है।
वहीं N. C. Wadhwa ने कहा कि संस्था अपने स्पोर्ट्स साइंस सेंटर और प्रशिक्षित कोचों के माध्यम से खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के साथ-साथ अंगदान के प्रति समाज में जागरूकता भी बढ़ा सकें।
इस अभियान को Subros Limited का भी सहयोग प्राप्त है। कंपनी के डीजीएम-एचआर Abhishek Chauhan ने भारतीय खिलाड़ियों को आगामी वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स और प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके बेहतर प्रदर्शन की कामना की।
ORGAN India का यह प्रशिक्षण शिविर केवल खिलाड़ियों की तैयारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अंगदान के महत्व को समाज तक पहुंचाना भी है। ट्रांसप्लांट के बाद सामान्य और सक्रिय जीवन जी रहे ये खिलाड़ी इस बात का प्रमाण हैं कि अंगदान किसी व्यक्ति को केवल नया जीवन ही नहीं देता, बल्कि उसके सपनों को भी नई उड़ान देता है। ऐसे में वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स 2027 में भारतीय टीम से एक बार फिर शानदार प्रदर्शन और अधिक पदकों की उम्मीद की जा रही है।


