Sunday, March 22, 2026
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श्रीमती अजन्ता की पुस्तक ‘मेरी माँ मेरी नज़र से’ का विमोचन, बेटी की कलम से माँ को नमन

गाज़ियाबाद (उत्तर प्रदेश), दिसंबर 16: रविवार, 14 दिसंबर, को CISF  मेसइंदिरापुरम में एक भावुक और स्मरणीय क्षण तब साकार हुआजबलेखिका श्रीमती अजन्ता द्वारा लिखित पुस्तक मेरी माँमेरी नज़र से काभव्य विमोचन किया गया यह पुस्तक केवल एक साहित्यिक कृतिनहींबल्कि एक बेटी की ओर से अपनी माँ के प्रति श्रद्धाकृतज्ञता औरसम्मान का सजीव दस्तावेज़ है

इस अवसर पर लेखिका ने साझा किया कि यह पुस्तक उनकी माँ श्रीमतीज्ञान कुमारी अजीत से मिली जीवनभर की प्रेरणा का परिणाम है श्रीमतीअजीत एक ऐसी शिक्षाविद् रही हैं जिन्होंने अपने कर्मसंस्कार और समर्पणसे केवल शिक्षा जगत बल्कि समाज को भी दिशा दी यह पुस्तक माँ कोदेखने का वही दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैजो केवल एक बेटी की आँखें औरउसका हृदय ही महसूस कर सकता है

श्रीमती ज्ञान कुमारी अजीत भारत स्काउट एंड गाइड हायर सेकेंडरी स्कूल केलड़कों के विद्यालय में प्रदेश की प्रथम महिला प्रधानाचार्या रही हैं शिक्षाऔर सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें अनेकराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया इनमें तत्कालीन राष्ट्रपति श्री ज्ञानीज़ैल सिंह द्वारा प्रदान किया गया नेशनल टीचर्स अवॉर्ड तथा पूर्व राष्ट्रपतिडॉ. .पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा प्रदान किया गया स्काउट एंड गाइड कासिल्वर स्टार अवॉर्ड विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं

शिक्षण के दायित्वों से आगे बढ़कर श्रीमती ज्ञान कुमारी अजीत नेलेखनसांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों तथा थियोसोफिकलसोसाइटी कार्यों में भी सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभाई उनकेव्यक्तित्व की सरलतामूल्यों की दृढ़ता और जीवन के प्रति उनकी दृष्टि कोइस पुस्तक में अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उकेरा गया है

विमोचन समारोह में परिवार के सदस्यशुभचिंतकशिक्षाविद् और उनकेअनेक पूर्व विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे सभी ने इस पुस्तक को एकऐसी कृति बतायाजो पीढ़ियों के बीच सेतु का कार्य करती है और यह याददिलाती है कि सच्ची विरासत पदों या पुरस्कारों से नहींबल्कि जीवन मूल्योंसे बनती है

वर्तमान में श्रीमती ज्ञान कुमारी अजीत अपने बेटेबेटीनातीपोते एवंपरपोतेपरपोतियों के साथ नोएडा में निवास कर रही हैं

मेरी माँमेरी नज़र से एक बेटी की भावनात्मक अभिव्यक्ति है, जो माँ कोकेवल एक शिक्षिका या समाजसेवी के रूप में नहींबल्कि एकमार्गदर्शकसंस्कारदाता और प्रेरणास्रोत के रूप मे प्रस्तुत करती है यहपुस्तक शिक्षासमर्पण और मानवीय मूल्यों में विश्वास रखने वाले हर पाठकको आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है

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