Wednesday, March 11, 2026
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प्लास्टिक कचरे से बनेगी ₹50,000 करोड़ की राष्ट्रीय संपदा, AVRO इंडिया ने शुरू किया ‘ऑपरेशन शुद्धि’

नई दिल्ली देश में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और उसे आर्थिक अवसर में बदलने के उद्देश्य से AVRO India Limited ने ‘ऑपरेशन शुद्धि’ नाम से एक राष्ट्रीय अभियान शुरू करने की घोषणा की है। कंपनी के चेयरमैन सुशील अग्रवाल ने कहा कि यदि प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से संग्रह और पुनर्चक्रण किया जाए तो इसे राष्ट्रीय संपदा में बदला जा सकता है और इससे करीब ₹50,000 करोड़ की सर्कुलर अर्थव्यवस्था विकसित की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि भारत में हर वर्ष लगभग 1 करोड़ मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है, जो प्रतिदिन करीब 26,000 मीट्रिक टन के बराबर है। इसमें दूध के पाउच, सीमेंट के बैग, नमक-चीनी की पैकिंग, पुट्टी और केमिकल पैकेजिंग, साड़ी कवर, प्याज-आलू के जालदार बैग और औद्योगिक पैकिंग शीट्स जैसे कई प्रकार के प्लास्टिक शामिल हैं, जिन्हें अक्सर रिसाइक्लिंग के लिए नहीं उठाया जाता। ऐसे प्लास्टिक को आमतौर पर जला दिया जाता है या जमीन में दबा दिया जाता है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है।

‘ऑपरेशन शुद्धि’ के तहत देशभर में एक संगठित प्लास्टिक संग्रह नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसके अंतर्गत आवासीय सोसाइटियों, स्कूल-कॉलेजों, मॉल, बाजार, होटल-हॉस्टल, मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारा, धर्मशालाओं और औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष ऑपरेशन शुद्धि डस्टबिन निःशुल्क लगाए जाएंगे। इन डस्टबिन से प्लास्टिक एकत्र कर उसे वैज्ञानिक तरीके से रीसाइक्लिंग और पुनः उपयोग की प्रक्रिया में भेजा जाएगा।

सुशील अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में कचरा बीनने वालों को प्लास्टिक के लिए केवल ₹2 से ₹5 प्रति किलो मिलते हैं, जबकि ‘ऑपरेशन शुद्धि’ के तहत उन्हें कम से कम ₹20 प्रति किलो देने की योजना है। इससे समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्ग को सीधा लाभ मिलेगा। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 5 किलो प्लास्टिक भी एकत्र करता है तो वह करीब ₹100 प्रतिदिन कमा सकता है।

उन्होंने बताया कि इस मिशन का लक्ष्य देशभर में 5 लाख से अधिक लोगों को जोड़ना है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस अवसर पर Swami Santosh Ananda,Swami Shailapananda, Jugal Kishore, Avadhesh Kumar, Rajesh Mahji सहित कई प्रमुख वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए और इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तरह का संगठित प्लास्टिक संग्रह और पुनर्चक्रण मॉडल पूरे देश में लागू किया जाता है तो इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा।

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