- नई दिल्ली: दिल्ली में सहकारी बैंकों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार और नाबार्ड ने साझा पहल शुरू की है। इसी कड़ी में नाबार्ड के नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (SLTC) और उच्च स्तरीय समिति (HLC) की बैठक आयोजित की।
बैठक में दिसंबर 2025 तक दिल्ली राज्य सहकारी बैंक में तकनीक अपनाने की प्रगति की समीक्षा की गई और बैंक के तकनीकी रोडमैप के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही दिल्ली में अल्पकालिक सहकारी ऋण संरचना (STCCS) के कामकाज की भी निगरानी की गई।
एसएलटीसी बैठक की अध्यक्षता दिल्ली स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष डॉ. बिजेंद्र सिंह ने की, जबकि नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक नवीन कुमार रॉय भी मौजूद रहे। बैठक में बैंक के प्रबंध निदेशक राजीव कादयान, नाबार्ड के अधिकारियों और अन्य संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
वहीं उच्च स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता दिल्ली सरकार के सचिव (सहकारिता) पांडुरंग के. पोल (IAS) ने की। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, नैबकॉन्स और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में सहकारी बैंक की वित्तीय स्थिति, नियामकीय अनुपालन, आंतरिक नियंत्रण, शिकायत निवारण, मानव संसाधन प्रबंधन, तकनीकी उन्नयन और वित्तीय समावेशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक नवीन कुमार रॉय ने कहा कि बेहतर ग्राहक सेवा, परिचालन दक्षता और ऋण वितरण को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाना जरूरी है। उन्होंने बैंक को “CBS प्लस” सेवाओं की दिशा में आगे बढ़ने के लिए समयबद्ध तकनीकी रोडमैप तैयार करने की सलाह दी।
दोनों समितियों ने सहकारी बैंकों की तकनीकी और संचालन संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और समाधान के लिए इस तरह की नियमित समीक्षा बैठकों को जरूरी बताया। बैठक का समापन सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को बढ़ावा देने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ।


