Wednesday, May 13, 2026
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From Diagnosis to Cure’ : फोर्टिस गुरुग्राम का थैलेसीमिया जागरूकता कार्यक्रम बना उम्मीद और जीवन का उत्सव

थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ जागरूकता फैलाने और इलाज के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत करने के उद्देश्य से Fortis मेमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट द्वारा एक विशेष जागरूकता एवं एडवोकेसी कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘एन्ड Thalassemia Mission’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में डॉक्टरों, थैलेसीमिया सर्वाइवर्स, अभिभावकों और सामाजिक हस्तियों ने हिस्सा लेकर समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया।

कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता विन्दु दारा सिंह, स्पोर्ट्स एंकर शेफाली बग्गा और शोभा तुली विशेष रूप से मौजूद रहे। सभी ने थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर इलाज की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस आयोजन की सबसे भावुक और प्रेरणादायक झलक तब देखने को मिली जब बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) के जरिए स्वस्थ हुए 60 से अधिक बच्चों ने मंच पर अपनी प्रस्तुतियां दीं। कभी नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन पर निर्भर रहने वाले इन बच्चों की मुस्कान और आत्मविश्वास ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक चिकित्सा ने थैलेसीमिया जैसी बीमारी को काफी हद तक हराने का रास्ता खोल दिया है।

कार्यक्रम के दौरान फोर्टिस के डॉक्टरों ने एक विशेष नाट्य प्रस्तुति भी दी, जिसमें थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों की भावनात्मक और शारीरिक चुनौतियों को दिखाया गया। साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि समय पर जांच, सही डोनर की पहचान और बोन मैरो ट्रांसप्लांट बच्चों को नई जिंदगी दे सकता है। नाटक में प्री-मैरिटल स्क्रीनिंग और जेनेटिक काउंसलिंग के महत्व को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।

Dr. Vikas Dua ने कहा कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट ने थैलेसीमिया के इलाज की तस्वीर बदल दी है। आज कई बच्चे ट्रांसप्लांट के बाद बिना ब्लड ट्रांसफ्यूजन के सामान्य जीवन जी रहे हैं। वहीं Dr. Rahul Bhargava ने कहा कि बेहतर ट्रांसप्लांट तकनीक और पोस्ट-ट्रांसप्लांट केयर की वजह से अब हाई-रिस्क मरीजों में भी अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।

Shobha Tuli ने कहा कि थैलेसीमिया पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है और जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा हथियार है। वहीं अभिनेता Vindu Dara Singh ने कहा कि यह देखकर बेहद खुशी होती है कि जो बच्चे कभी बीमारी से संघर्ष कर रहे थे, वे आज स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने पैनल चर्चा के जरिए थैलेसीमिया के इलाज, जागरूकता और भारत को थैलेसीमिया मुक्त बनाने के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की। आयोजन ने यह संदेश दिया कि सही समय पर जांच और आधुनिक इलाज के जरिए थैलेसीमिया से लड़ाई जीती जा सकती है।

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