नई दिल्ली: हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह के 815वें सालाना उर्स के मुबारक मौके पर देशभर से बड़ी संख्या में जायरीन ने महरौली स्थित उनकी दरगाह पर पहुंचकर अकीदत के साथ हाजिरी दी। इस दौरान दरगाह परिसर में दिनभर जायरीन की आमद का सिलसिला जारी रहा और लोगों ने चादर व फूल पेश कर मुल्क में अमन, खुशहाली और भाईचारे के लिए दुआएं मांगीं।

उर्स के मौके पर हजरत निजामुद्दीन औलिया महबूब-ए-इलाही की दरगाह के चेयरमैन सैयद अफसर अली निजामी ने भी हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह के दरबार में हाजिरी दी। उन्होंने मजार-ए-मुबारक पर फूल पेश किए और मुल्क में अमन-ओ-अमान, तरक्की और खुशहाली के लिए दुआ-ए-खैर की।

वहीं, दरगाह हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह के सज्जादा सैयद सलमान कुतबी ने भी उर्स के मौके पर आने वाले जायरीन की हाजिरी करवाई और उनके लिए दुआ-ए-खैर की। उन्होंने कहा कि उर्स के मुबारक मौके पर देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में जायरीन दरबार में पहुंचे और अपनी अकीदत पेश की।
सैयद सलमान कुतबी ने कहा कि हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह की तालीमात मोहब्बत, इंसानियत, भाईचारे और अमन का पैगाम देती हैं। उर्स के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने मुल्क की तरक्की, अमन और खुशहाली के लिए दुआ की।
उन्होंने कहा कि दरगाह पर आने वाले सभी अकीदतमंदों का खैरमकदम किया गया और उनकी हाजिरी कराई गई। उर्स के दौरान दरगाह का माहौल पूरी तरह रूहानी और अकीदत से सराबोर नजर आया। जायरीन ने मजार-ए-मुबारक पर फूल पेश कर अपनी मन्नतें मांगीं और फातिहा पढ़ी।
815वें उर्स के अवसर पर दरगाह में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने से महरौली का पूरा इलाका रूहानी माहौल में नजर आया। जायरीन ने एक-दूसरे को उर्स की मुबारकबाद दी और देश में अमन, भाईचारे तथा आपसी सौहार्द कायम रहने की दुआ की।


