*“जिंदगी बचाने वाली दवाइयों से मौत का खेल!*

दिल्ली में नकली दवाइयों का ऐसा खतरनाक खेल सामने आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। जिन दवाइयों पर लोगों की जिंदगी टिकी होती है, वही दवाइयां नकली बनाकर बाजार में बेची जा रही थीं। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने एक बड़े इंटर-स्टेट रैकेट का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक यह गैंग सरकारी अस्पतालों में सप्लाई होने वाली दवाइयों को अवैध तरीके से बाहर निकालता था। इसके बाद दवाइयों के असली लेबल हटाकर उन पर नए नकली लेबल लगाए जाते थे और फिर उन्हें खुले बाजार में बेच दिया जाता था। इतना ही नहीं, कुछ लाइफ सेविंग दवाइयों को नकली तरीके से तैयार भी किया जा रहा था।
क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में एक फ्लैट के अंदर बड़े स्तर पर नकली दवाइयों की पैकिंग और री-लेबलिंग का काम चल रहा है। सूचना के बाद पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग की संयुक्त टीम ने छापा मारा। मौके से भारी मात्रा में नकली दवाइयां, पैकिंग मशीनें, लेबल और मेडिकल सामान बरामद किया गया।
बरामद दवाइयों में रेबीज वैक्सीन, इंसुलिन, हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन, स्नेक वेनम एंटीसीरम, ह्यूमन एल्ब्यूमिन और कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इन दवाइयों की बाजार कीमत करीब 6 करोड़ रुपये है।
जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क की सप्लाई सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं थी, बल्कि कोलकाता, गुवाहाटी, इम्फाल और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों तक फैली हुई थी।
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पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी मनोज कुमार जैन पहले निर्माण कार्य से जुड़ा था, लेकिन घाटा होने के बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर नकली दवाइयों का धंधा शुरू कर दिया। उसके साथी उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों से दवाइयां जुटाते थे और फिर दिल्ली में उनका लेबल बदलकर बाजार में सप्लाई की जाती थी।
क्राइम ब्रांच अब इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक जांच भी कर रही है। शुरुआती जांच में हवाला के जरिए पैसों के लेन-देन की बात भी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


