नोएडा, 18 जून। फादर्स डे के अवसर पर पुरुषों की प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) से जुड़ी एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। कैलाश IVF द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष फर्टिलिटी उपचार के लिए पहुंचे मरीजों में लगभग 40 प्रतिशत मामले पुरुषों में इनफर्टिलिटी से जुड़े पाए गए। इतना ही नहीं, पुरुष इनफर्टिलिटी के हर चार मामलों में से एक में स्पर्म काउंट शून्य (एजोस्पर्मिया) पाया गया।
कैलाश IVF के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान जांचे गए करीब 1,000 फर्टिलिटी मरीजों में से लगभग 400 पुरुष इनफर्टिलिटी से प्रभावित थे। यह आंकड़ा उस धारणा को चुनौती देता है कि संतान प्राप्ति में आने वाली समस्याएं मुख्य रूप से महिलाओं से संबंधित होती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर तनाव, मोटापा, शारीरिक गतिविधियों की कमी, धूम्रपान, शराब का सेवन, अनियमित जीवनशैली, प्रदूषण तथा स्टेरॉयड के दुरुपयोग जैसे कारकों का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण, हार्मोनल असंतुलन, संक्रमण, सर्जरी या कीमोथेरेपी भी जिम्मेदार हो सकती है।
कैलाश IVF, नोएडा की निदेशक डॉ. रिनी शर्मा ने कहा कि पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या आम होने के बावजूद आज भी इसे लेकर सामाजिक झिझक और गलत धारणाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में उनके केंद्र पर इलाज कराने वाले करीब 40 प्रतिशत मरीजों में पुरुषों से संबंधित फर्टिलिटी समस्याएं पाई गईं। हालांकि अब अधिक पुरुष जांच के लिए आगे आ रहे हैं, जिससे समय रहते समस्या का पता लगाकर उपचार शुरू करना संभव हो रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फर्टिलिटी केवल महिलाओं का नहीं बल्कि पति-पत्नी दोनों का साझा विषय है। इसलिए संतान प्राप्ति में कठिनाई होने पर दोनों पार्टनर की एक साथ जांच कराना आवश्यक है। इससे बीमारी की सही पहचान और उपचार की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
कैलाश IVF ने हाल ही में जागरूकता बढ़ाने और समय पर जांच को प्रोत्साहित करने के लिए एक निःशुल्क फर्टिलिटी जांच शिविर भी आयोजित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहलें लोगों को रिप्रोडक्टिव हेल्थ के प्रति जागरूक बनाने और सामाजिक झिझक को कम करने में मददगार साबित हो रही हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में इनफर्टिलिटी तेजी से उभरती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन रही है। ऐसे में जागरूकता, समय पर जांच और दोनों पार्टनर्स की सक्रिय भागीदारी ही बेहतर परिणाम सुनिश्चित कर सकती है।


