साइबर पुलिस ने पांच आरोपियों को दबोचा, मंगोलपुरी में चल रहा फर्जी कॉल सेंटर भी पकड़ा
नई दिल्ली। क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर लोगों से कार्ड की गोपनीय जानकारी हासिल कर ठगी करने वाले गिरोह का नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली की साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान करण उर्फ काके (30), राकेश कुमार उर्फ राणा (47), फैजान (23), रौनक (26) और गौरव शर्मा (24) के रूप में हुई है। सभी आरोपी दिल्ली के रहने वाले हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने करावल नगर निवासी प्रशांत शर्मा को बैंक अधिकारी बनकर फोन किया था। फोन करने वाले ने क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा दिया। इसके बाद उसे बैंक की आधिकारिक वेबसाइट जैसी दिखने वाली एक फर्जी वेबसाइट पर भेजकर क्रेडिट कार्ड की गोपनीय जानकारी भरवाई गई। जानकारी मिलते ही आरोपियों ने कार्ड से करीब 31,663 रुपये की अनधिकृत खरीदारी कर ली।
इस संबंध में ई-एफआईआर नंबर 24/2026, दिनांक 9 सितंबर 2026, बीएनएस की धारा 318(4)/319(2) के तहत साइबर थाना, नॉर्थ-ईस्ट जिला में मामला दर्ज किया गया।
ठगी के पैसों से खरीदा एक ग्राम सोने का बार
जांच के दौरान पुलिस ने ठगी की रकम के डिजिटल और वित्तीय लेनदेन की जांच की। सामने आया कि ठगी की रकम से Ajio वेबसाइट के जरिए एक ग्राम सोने का बार खरीदा गया था। इसे तिलक नगर के एक संदिग्ध पते पर डिलीवर कराया गया।
इसके बाद पुलिस ने फर्जी बैंक वेबसाइट की तकनीकी जांच शुरू की। जांच में गौरव शर्मा का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार, गौरव ने फर्जी वेबसाइट तैयार की थी। वहीं रौनक ने वेबसाइट तैयार कराने के लिए भुगतान करने में मदद की थी।
*मंगोलपुरी से चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर*
तकनीकी जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को पता चला कि करण उर्फ काके और राकेश कुमार उर्फ राणा मंगोलपुरी से फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। दोनों कथित तौर पर बैंक प्रतिनिधि बनकर लोगों को फोन करते और क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर उनकी गोपनीय जानकारी हासिल करते थे।
पुलिस ने फैजान को भी गिरफ्तार किया। आरोप है कि वह अपने नाम पर सिम कार्ड और मोबाइल फोन उपलब्ध कराता था, ताकि गिरोह के सदस्य अपनी पहचान छिपाकर साइबर ठगी को अंजाम दे सकें।
*नौ मोबाइल और लैपटॉप बरामद*
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल नौ मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इनमें से एक मोबाइल का इस्तेमाल शिकायतकर्ता से संपर्क करने में किया गया था, जबकि अन्य मोबाइलों से दूसरे संभावित पीड़ितों को फोन किए जाने का आरोप है।
इसके अलावा गौरव शर्मा से एक लैपटॉप बरामद किया गया है। पुलिस का दावा है कि इसी लैपटॉप का इस्तेमाल फर्जी Axis Bank वेबसाइट तैयार करने और संचालित करने में किया गया।
पुलिस के मुताबिक, बरामद मोबाइल फोन से देशभर में दर्ज 14 NCRP शिकायतों का लिंक भी सामने आया है। इससे आशंका है कि आरोपी कई अन्य लोगों को भी इसी तरीके से निशाना बना चुके हैं।
*ऐसे करते थे ठगी*
जांच में सामने आए तरीके के मुताबिक, गिरोह के सदस्य बैंक अधिकारी बनकर संभावित पीड़ितों को फोन करते थे। उन्हें क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद बैंक की वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजा जाता था।
पीड़ित जैसे ही वेबसाइट पर अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी दर्ज करता था, आरोपी उस जानकारी का इस्तेमाल अनधिकृत लेनदेन के लिए करते थे। पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग मोबाइल फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था। फर्जी वेबसाइट तैयार करने के लिए तकनीकी मदद भी दूसरे साथियों से ली जाती थी।
*पुलिस टीम ने ऐसे की कार्रवाई*
मामले की जांच के लिए एसआई मोहित कुमार, एएसआई मनोज, हेड कांस्टेबल संदीप कुमार, कांस्टेबल अभिषेक और कांस्टेबल कपिल की टीम बनाई गई। टीम ने इंस्पेक्टर राहुल कुमार, एसएचओ साइबर थाना, नॉर्थ-ईस्ट जिला की निगरानी में कार्रवाई की।
9 सितंबर को की गई कार्रवाई के दौरान करण उर्फ काके और राकेश कुमार उर्फ राणा को पकड़ा गया। पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने बाद में फैजान, गौरव शर्मा और रौनक को भी गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर अपनी भूमिका और ठगी के तरीके के बारे में जानकारी दी है। जांच के दौरान गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की उम्मीद है।
आरोपियों की प्रोफाइल
करण उर्फ काके (30): 10वीं पास है और बेगमपुर में जूते बेचता है। पुलिस के अनुसार, वह बैंक प्रतिनिधि बनकर लोगों को फोन करता था। उसके खिलाफ पहले घर में चोरी का एक मामला दर्ज है।
राकेश कुमार उर्फ राणा (47): 8वीं पास है और बेगमपुर में जूते बेचता है। उस पर बैंक प्रतिनिधि बनकर लोगों से संपर्क करने का आरोप है। उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट का एक मामला दर्ज है।
फैजान (23): पुलिस के मुताबिक, वह सिम कार्ड उपलब्ध कराने का काम करता था। उसके खिलाफ लूट, चोरी और ठगी से जुड़े तीन मामले पहले से दर्ज हैं।
रौनक (26): 9वीं पास है और करोल बाग में मोबाइल एक्सेसरीज बेचता है। पुलिस के अनुसार, उसने फर्जी वेबसाइट तैयार कराने के भुगतान में मदद की थी। उसके खिलाफ कोई पिछला मामला सामने नहीं आया है।
गौरव शर्मा (24): बीकॉम पास है और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है। पुलिस के मुताबिक, उसने फर्जी बैंक वेबसाइट तैयार की थी। उसके खिलाफ कोई पिछला मामला नहीं मिला है।
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। साथ ही ठगी की बाकी रकम का पता लगाने और अपराध से हासिल रकम की बरामदगी के लिए जांच जारी है।


