नई दिल्ली/देहरादून, मंगलवार।
दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर उत्तराखंड के प्रति अपने गहरे प्रेम और जुड़ाव को प्रदर्शित किया। अपने चिर-परिचित अंदाज में उन्होंने न केवल पारंपरिक ब्रह्मकमल टोपी धारण की, बल्कि अपने संबोधन में गढ़वाली और कुमाऊंनी बोली के शब्दों का प्रयोग कर जनता से भावनात्मक संबंध स्थापित किया।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत भुला-भुलियों, सयाणा, आमा और बाबा जैसे स्थानीय शब्दों से की, जिससे कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के बीच खास अपनापन महसूस हुआ। उन्होंने दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे के निर्माण में मां डाट काली के आशीर्वाद का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि देहरादून पर उनकी सदैव कृपा बनी रहती है। साथ ही, उत्तर प्रदेश में स्थित संतला माता मंदिर का भी स्मरण किया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित करते हुए हरिद्वार कुंभ, नंदा राजजात, पंच बदरी, पंच केदार और पंच प्रयाग का प्रभावशाली जिक्र किया। इन संदर्भों ने उनके भाषण को स्थानीय भावनाओं से जोड़ते हुए एक मजबूत “लोकल कनेक्ट” स्थापित किया।
पीएम-सीएम की मजबूत बॉन्डिंग फिर आई नजर
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बीच मजबूत तालमेल भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री धामी को लोकप्रिय, कर्मठ और युवा बताते हुए उनकी सराहना की।
इसके अतिरिक्त, जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जनसभा को संबोधित कर रहे थे, उस दौरान प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच किसी महत्वपूर्ण विषय पर संवाद भी देखा गया। मुख्यमंत्री की बात को प्रधानमंत्री द्वारा ध्यानपूर्वक सुनना दोनों नेताओं के बीच सुदृढ़ समन्वय का प्रतीक रहा।


