नई दिल्ली। इतिहास गवाह है कि जिन समुदायों ने कठिनाइयों को अवसर में बदला, उन्होंने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। सिंधी समाज इसका जीवंत उदाहरण है। 1947 के विभाजन की त्रासदी से उभरकर वैश्विक व्यापार और सांस्कृतिक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने वाला यह समुदाय अब एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्याय की ओर बढ़ रहा है। *सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया* द्वारा आयोजित जापान-कोरिया कॉन्क्लेव इसी दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो “विस्थापन से विस्तार” तक की प्रेरक यात्रा को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा।
विभाजन के दौरान अपना घर, जमीन और संसाधन खो देने के बावजूद सिंधी समाज ने हार नहीं मानी। सीमित संसाधनों के बावजूद इस समुदाय ने अपने परिश्रम, व्यावसायिक कौशल और एकजुटता के बल पर देश-विदेश में अपनी पहचान स्थापित की। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी भाषा, संस्कृति, लोक परंपराओं और धार्मिक आस्था को भी संजोए रखा। आज सिंधी समाज को वैश्विक व्यापार जगत में एक मजबूत और भरोसेमंद समुदाय के रूप में देखा जाता है।
सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया के वरिष्ठ सलाहकार मोहन आहूजा के अनुसार, यह कॉन्क्लेव केवल एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आर्थिक मिशन है। इसका उद्देश्य सिंधी समाज की विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के साथ-साथ जापान और दक्षिण कोरिया जैसे तकनीकी रूप से अग्रणी देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना है।
इस आयोजन में “वसुधैव कुटुंबकम”के संदेश को केंद्र में रखते हुए भगवान झूलेलाल की शिक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जाएगा। साथ ही, जापानी नवाचार और तकनीक के साथ MSME सेक्टर में नए निवेश और साझेदारी के अवसरों पर भी चर्चा होगी।
इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आयोजन सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद सुरेश केसवानी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। वहीं, उत्तरी भारत के अध्यक्ष अशोक लालवानी और उनकी टीम ने इसकी रूपरेखा तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है।
टोक्यो में 17 मई को जापान चैप्टर का भव्य शुभारंभ किया जाएगा, जिसका नेतृत्व राम पेसुमल कलानी करेंगे। यह पहल खासतौर पर नई पीढ़ी को “लोकल से ग्लोबल” की सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
यह ऐतिहासिक यात्रा 7 मई को भारत से शुरू होगी, जिसमें क्रूज़ अनुभव के साथ दक्षिण कोरिया और जापान के प्रमुख शहरों का भ्रमण शामिल होगा।
17 मई: टोक्यो में जापान चैप्टर का शुभारंभ
19 मई: टोक्यो में मुख्य कॉन्क्लेव
20 मई: यात्रा का समापन
इस आयोजन में देश-विदेश से 250 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें वरिष्ठ IAS अधिकारी, राजनीतिक नेतृत्व, उद्योगपति और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
कार्यक्रम के लॉजिस्टिक्स और सांस्कृतिक गतिविधियों का संचालन RTW टीम (विनोद और कविता) द्वारा किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, यात्रा के दौरान सभी व्यवस्थाओं को उच्च स्तर पर सुनिश्चित किया गया है, ताकि प्रतिभागियों को एक प्रीमियम और यादगार अनुभव मिल सके।
यात्रा के सफल समापन के बाद एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें इस कॉन्क्लेव से जुड़े अनुभवों और जापान की संस्कृति को समाज के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही, आयोजन में योगदान देने वाले सहयोगियों, कलाकारों और ट्रेवल एजेंसियों को सम्मानित किया जाएगा।
यह कॉन्क्लेव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सिंधी समाज की जीवटता, संघर्ष और सफलता का प्रतीक है। यह दुनिया को यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियां किसी समुदाय को रोक नहीं सकतीं, बल्कि उन्हें और मजबूत बना सकती हैं।सिंधी समाज आज केवल अपने अस्तित्व को बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक मंच पर नेतृत्व करने और नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है।


