नई दिल्ली। एंड-स्टेज लंग डिजीज (फेफड़ों की गंभीर बीमारी) से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने कम्प्रेहेंसिव लंग ट्रांसप्लांट प्रोग्राम की शुरुआत की है। इसके साथ ही अस्पताल ने एडवांस्ड थोरेसिक सर्जरी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट सेवाओं का विस्तार करते हुए एक ही छत के नीचे जांच, लंग ट्रांसप्लांट सर्जरी और ऑपरेशन के बाद दीर्घकालिक देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराई है।
अस्पताल के अनुसार, यह कार्यक्रम उन मरीजों के लिए तैयार किया गया है जिनकी फेफड़ों की बीमारी इतनी गंभीर हो चुकी है कि दवाइयों या सामान्य इलाज से उन्हें लाभ नहीं मिल रहा। इस सुविधा से इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD), सीओपीडी (COPD), पल्मोनरी फाइब्रोसिस, पल्मोनरी हाइपरटेंशन, ब्रोंकिएक्टेसिस समेत अन्य गंभीर फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को फायदा मिलेगा।
लंग ट्रांसप्लांट आधुनिक चिकित्सा की सबसे जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं में गिना जाता है। इसकी सफलता केवल सर्जरी पर नहीं, बल्कि मरीज के सही चयन, डोनर फेफड़ों के मूल्यांकन, एडवांस्ड क्रिटिकल केयर, संक्रमण नियंत्रण, पुनर्वास और लंबे समय तक फॉलो-अप पर भी निर्भर करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम तैयार की है, जिसमें थोरेसिक सर्जन, पल्मोनोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, इंटेंसिविस्ट, कार्डियक एनेस्थेटिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट और ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर शामिल हैं।
थोरेसिक सर्जरी एवं लंग ट्रांसप्लांटेशन के सीनियर डायरेक्टर डॉ. प्रमोज जिंदल ने कहा कि एंड-स्टेज लंग डिजीज के कई मरीजों के लिए एक समय ऐसा आता है जब दवाइयां और ऑक्सीजन थेरेपी भी प्रभावी नहीं रह जातीं। ऐसे मामलों में लंग ट्रांसप्लांट ही जीवन बचाने और उसकी गुणवत्ता बेहतर बनाने का सबसे प्रभावी विकल्प होता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में एडवांस्ड क्रिटिकल केयर, ईसीएमओ सपोर्ट और विशेषज्ञों की टीम के जरिए मरीजों को समग्र ट्रांसप्लांट सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
वहीं, अस्पताल के वाइस प्रेसिडेंट एवं यूनिट हेड डॉ. सुहास परनामी ने कहा कि यह कार्यक्रम उत्तर भारत में एडवांस्ड ऑर्गन ट्रांसप्लांट सेवाओं को और मजबूत करेगा। अस्पताल में डेडिकेटेड ट्रांसप्लांट आईसीयू, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और ईसीएमओ जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार अपने शहर में ही मिल सकेगा।
अस्पताल का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल ट्रांसप्लांट सुविधा देना ही नहीं, बल्कि गंभीर फेफड़ों के मरीजों की समय रहते पहचान और उन्हें उचित समय पर ट्रांसप्लांट के लिए रेफर किए जाने के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मूल्यांकन और तैयारी से ट्रांसप्लांट की सफलता की संभावना बढ़ाई जा सकती है।


